प्रथम पट्टाचार्य महामहोत्सव के अवसर पर विद्या-विशुद्ध निलय भवन का शुभारंभ

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, अंजनी नगर में श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रथम पट्टाचार्य महामहोत्सव के अवसर पर विद्या-विशुद्ध निलय भवन का शुभारंभ समाज श्रेष्ठी पाटोदी जितेंद्र-अनीता परिवार द्वारा सम्पन्न हुआ। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि अंजनी नगर स्थित श्री चंद्रप्रभु मांगलिक भवन में आयोजित ग्रीष्मकालीन वाचना के दौरान आयोजित किया गया। परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी संसघ के कुल गोरव श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी श्रुत प्रिय मुनि श्री अप्रमित सागर जी, सहजानंदी मुनि श्री सहज सागर जी एवं छुल्लक श्री श्रेयस सागर जी महाराज के संसघ सानिध्य में हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री आदित्य सागर जी ने अपनी मंगल देशना में स्वाध्याय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वाध्याय से धैर्य प्राप्त होता है, स्वाध्याय ही परम तप है स्वाध्याय से मन शांत चित्त रहता है और पुण्य की अभी वृद्धी होती है। गुरुदेव ने कहा कि धीरे-धीरे अध्ययन करने से एकाग्रता बनी रहती है और मन भटकता नहीं है। स्वाध्याय व्यक्ति को आंतरिक रूप से सुरक्षित रखता है तथा जिनकी इसमें रुचि होती है, वे आगे चलकर मोक्ष मार्ग की और अग्रसर होते हैं। मुनि श्री ने कहा कि गुरु की संगति से जीवन के अनेक कार्य सरल हो जाते हैं और ”भगवान की संगत में रहोगे तभी भगवान बन पाओगे।” दिगंबर जैन समाज अंजनी नगर के देवेंद्र सोगानी , ऋषभ पाटनी राजेश काला चिराग गोधा केलाश वेद आदि समाज जन उपस्थित रहे।

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