गुरु राम की यश कीर्ति बढ़ाते हुए 66 दिवसीय संथारा साधिका महासती कीर्तियशा श्रीजी की निकली डोल यात्रा

रतलाम 6 मई। गुरु राम की यश कीर्ति बढ़ाते हुए 66 दिवसीय संथारा साधिका महासती कीर्तियशा श्रीजी की डोल यात्रा निकली । आप साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर, युग निर्माता, परमागम रहस्य ज्ञाता परम पूज्य आचार्य भगवन् 1008 श्री रामलाल जी म.सा. एवं उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती थी।
संथारा साधिका महासती साध्वी श्री कीर्तियशा श्री जी म.सा. का आज दोपहर लगभग 2:00 बजे चौविहार संथारा सिजा।साध्वी श्री का संथारा अत्यंत अनुशासन और साधना के साथ गतिमान था। आज उनके संथारे का 66 वां दिन एवं चौविहार संथारे का 13वां दिन था। अंतिम क्षणों में उन्होंने पूर्ण शांति और समाधि भाव के साथ देह त्याग कर आत्मकल्याण की दिशा में महाप्रयाण किया।
संध्या 5:00 बजे वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ट्रस्ट बोर्ड के द्वारा समता सदन, घास बाजार से उनकी डोल यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन एवं श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। पूरे मार्ग में श्रद्धा, भक्ति और नम आंखों के साथ अंतिम विदाई दी गई। डोल यात्रा राम गुरु की जय जयकार के साथ त्रिवेणी मुक्ति धाम पहुंची, जहां धार्मिक विधि-विधान के साथ महाप्रयाण यात्रा पूर्ण हुई। इस अवसर पर संघ के उपाध्यक्ष प्रीतेश गादिया ने बताया कि साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष विनोद जी मेहता मालवा अंचल के अध्यक्ष श्री विजय टंच सकल जैन श्री संघ के प्रकाश मूणत वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ से अजय खिमेसरा आदि समाजजनों ने साध्वी श्री के तप, त्याग और संयममय जीवन को स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस संथारा निमित्त कल गुनानुवाद सभा का आयोजन प्रातः 9:00 बजे डीपी परिसर लकडपीठा पर शासन दीपक निश्चल मुनि जी महाराज साहब आदि ठाणा के सानिध्य में होगा।
इस अवसर पर संघ के पूर्व अध्यक्ष मदनलाल कटारिया, बाबूलाल सेठिया, कपूर कोठारी, सुदर्शन पिरोदिया, कांतिलाल छाजेड़, उपाध्यक्ष सुशील गोरेचा, दशरथ बाफना, अतुल बाफना, विनोद मूणत, सुनील पटवा, सुमित कटारिया, सुनील कोठारी, प्रकाश नांदेचा, महेंद्र कटारिया, निर्मल भंडारी, प्रकाश कोठारी, जावरा संघ के पंकज कठेड, बदनावर संघ से मनोज बोहरा एवं स्थानीय एवं आसपास कई संघ की समस्त इकाई महिला मंडल बहू मंडल समता युवा संघ बालक मंडल बालिका मंडल के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। सभा का संचालन पूर्व अध्यक्ष चंदन पिरोदिया ने किया आभार मंत्री पंकज मूणत ने माना ।

संथारा क्या है?

जैन धर्म में संथारा (या सल्लेखना) एक अत्यंत पवित्र और अनुशासित आध्यात्मिक प्रक्रिया है। यह जीवन के अंतिम चरण में किया जाने वाला व्रत है, जिसमें साधक धीरे-धीरे आहार और जल का त्याग करते हुए पूर्ण संयम, ध्यान और समता भाव से शरीर का परित्याग करता है।
संथारा का उद्देश्य मृत्यु को आत्मशुद्धि और कर्म क्षय का माध्यम बनाना है। इसमें किसी प्रकार की जल्दबाजी या पीड़ा नहीं होती, बल्कि यह पूर्ण जागरूकता, स्वीकृति और साधना के साथ किया जाने वाला त्याग है।
इस प्रक्रिया में साधक राग-द्वेष से मुक्त होकर, क्षमा-याचना करते हुए और आत्मचिंतन में लीन रहकर जीवन का अंतिम क्षण पूर्ण आध्यात्मिक एकाग्रता के साथ व्यतित करता है।

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