रतलाम 06 मई । शासन द्वारा शिक्षकों के लिए विश्राम अवकाश (ग्रीष्मकालीन अवकाश) घोषित किए जाने के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा शिक्षकों को जनगणना और परीक्षा ड्यूटी जैसे दोहरे कार्यों में झोंका जा रहा है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न करार दिया है।
असमंजस में शिक्षक: जनगणना करें या परीक्षा पर्यवेक्षण?
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि भारत की जनगणना 2027 का कार्य 1 मई 2026 से प्रारंभ हो चुका है, जिसमें शिक्षकों की ड्यूटी प्रगणक और सुपरवाइजर के रूप में लगाई गई है। दूसरी ओर, लोक शिक्षण संचालनालय (भोपाल) द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं की ‘द्वितीय अवसर’ परीक्षा आयोजित की जा रही है, जिसमें भी शिक्षकों को पर्यवेक्षक बना दिया गया है। शिक्षक इस असमंजस में हैं कि वे आखिर किस दायित्व का निर्वहन करें?
विश्राम अवकाश का क्या औचित्य?
जिला अध्यक्ष गोपाल उपाध्याय एवं अन्य पदाधिकारियों ने प्रश्न उठाया है कि जब 1 मई से शासन ने विधिवत अवकाश घोषित कर दिया है, तो जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक द्वारा नित्य नए निर्देश क्यों दिए जा रहे हैं? अवकाश के दौरान शिक्षकों से पुस्तक वितरण, रसोइयों की जानकारी और अन्य प्रशासनिक डेटा माँगा जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है।
संगठन की मुख्य मांगें और चेतावनी:
एक समय में एक ड्यूटी: शिक्षक किसी एक कार्य को करने के लिए बाध्य है, दोहरे कार्य के लिए नहीं।
मानसिक प्रताड़ना पर रोक: अवकाश के दौरान विभागीय जानकारी हेतु दबाव बनाना बंद किया जाए।
अवकाश की गरिमा: यदि अवकाश में भी कार्यालयीन समय की तरह कार्य कराना है, तो शासन अवकाश निरस्त कर शिक्षकों को अन्य कर्मचारियों के समान अर्जित अवकाश की सुविधा प्रदान करे।
आंदोलन की चेतावनी:
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के जिला संगठन मंत्री बद्रीलाल मढ़ौतिया, जिला अध्यक्ष गोपाल उपाध्याय, सचिव जितेन्द्र सिंह चौहान, दिलीप पोरवाल, एफ.एम. बैरागी, संजय उपाध्याय, रंजीत परमार, सविता कारपेंटर, पन्नालाल चौहान एवं आनंदीलाल गांधी ने संयुक्त रूप से कहा कि यदि प्रशासन ने अपना अड़ियल रवैया नहीं बदला और शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बंद नहीं किया, तो संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।