
इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। संस्कारधानी जबलपुर की धरा से दो हजार समाज जन एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा से स्पंदित होने को आतुर है। हाल ही में जबलपुर के सकल दिगंबर जैन समाज पंचायत एवं समस्त कमेटी सदस्यों एवं समाज जन ने परम पुज्य निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज संसघ के चरणों में वर्ष 2026 के वर्षायोग हेतु मुंगावली में विराजमान परम पुज्य गुरुदेव के पास पहुँचकर एक सामूहिक गुरु भक्ति और ऐतिहासिक सविनय निवेदन किया। यह केवल एक औपचारिक आमंत्रण नहीं, बल्कि हजारों गुरु भक्तों की आस्था और 15 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात जाग्रत हुई ।
जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि भक्ति का सैलाब: भीषण गर्मी पर भारी पड़ा उत्साह
समाज के समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद 2000 से अधिक श्रद्धालु, 40 बसों और निजी वाहनों के काफिले के साथ मुंगावली पहुँचे। और गुरु दर्शन ,पाद प्रक्षालन कर संस्कार धानी जबलपुर दिगंबर जैन समाज द्वारा निवेदन किया गया संयुक्त प्रतिनिधित्व: किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि दिगंबर जैन पंचायत सभा, जैन नवयुवक सभा और शहर के प्रमुख जिनालयों (लाडगंज, संगम कॉलोनी, शिवनगर, हनुमान ताल आदि) की ट्रस्ट कमेटियों का एकसाथ एक स्वर में था। इस अवसर पर गुरु देव ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा जबलपुर समाज को दिए जीवन दर्शन के क्रांतिकारी सूत्र :
चातुर्मास की घोषणा और पुण्य का विज्ञान
मुनिश्री ने बताया कि चातुर्मास की तत्काल घोषणा न करना भी करुणा का ही एक रूप है। उन्होंने कहा कि यदि स्थान पहले तय हो जाए, तो केवल एक नगर को पुण्य मिलता है। किंतु अनिश्चितता की स्थिति में, प्रयास करने वाले हर नगर और हर भक्त को चातुर्मास का पूर्ण फल प्राप्त होता है।* जबलपुर जैन समाज का यह निवेदन केवल एक चातुर्मास की मांग नहीं, बल्कि संस्कारधानी को पुनः ‘धर्मधानी’ बनाने का संकल्प है। मुनिश्री के उपदेशों से समाज को यह स्पष्ट कर दिया कि चातुर्मास केवल एक नगर का प्रवास नहीं, बल्कि पूरे समाज के आत्म-चिंतन और सुधार का अवसर है। अब संपूर्ण समाज को अपनी चिर-परिचित शैली में मंद मंद मुस्कान के साथ इस वर्ष के चातुर्मास के लिए आशीर्वाद दिया।संस्कारधानी को मुनिश्री की मंगल पदस्थापना की प्रतीक्षा है।