गुरु गौतम के पावन सानिध्य में मामटखेड़ा रोग्या देवी के बीच में चत्तर परिवार द्वारा चंद्र प्रकाश विहार धाम का लोकार्पण

जावरा (अभय सुराणा) । संसार में व्यक्ति की चार प्रकार से पहचान होती है पहली पिता के नाम से दूसरी स्वयं के नाम से तीसरी मामा के नाम से और चौथी ससुराल के नाम से जाना जाता है पिता के नाम से जाना जाए वहां तक तो ठीक है लेकिन मामा और ससुराल के नाम से जाना जाए ठीक नहीं है। अपने नाम से जानना ही श्रेष्ठ है जीवन में कुछ ऐसे कार्य करे की जन-जन के लिए हो गुरु कस्तूर को 40 वर्ष के बाद भी उनका नाम जन-जन के लिए आस्था का केंद्र है जैसे राम को जानते हैं दशरथ जी को नहीं पिता की इच्छा को सुयोग्य पुत्र पूरा करते हैं माता-पिता और गुरु की वाणी पर कभी नहीं सोचना चाहिए जो करेगा उसकी कीर्ति फैलती रहती है।
उपरोक्त प्रेरक प्रवचन उपाध्याय प्रवर डॉक्टर गौतम मुनि जी महारा साहब ने चंद्र प्रकाश बिहार धाम के लोकार्पण पर कहे आगे उन्होंने कहा कि जैन दिवाकर जी महारा साहब ने श्रीपाल चरित्र में लिखा कि जो जिंदा है लेकिन लोग पसंद नहीं करते हैं वह मुर्दे के समान है और जो मुर्दा है लेकिन लोग उनके गुणो को याद करते हैं वह मुर्दा होने के बाद भी लोगों के हृदय में जिंदा है जो अच्छे कार्य करते हैं लोग उन्हें याद करते हैं लोग गुरु की गलती निकालने में नंबर वन होते हैं अच्छे कार्य में पैसा लगाना चाहिए नहीं तो सरकार डॉक्टर और वकील के पास में चला जाता है।
गुरु मूल कहते थे थके हुए को स्थान देना जब गर्मी में संत आए तो वातावरण साताकारी हो विशाल ने विशालता दिखाइ चांद बीज का सुहाना लगता है संत और सतीया जी के लिए बिहार धाम बनाकर चत्तर परिवार ने अच्छा कार्य किया है तपस्वी वैभव मुनि जी म सा ने कहा कि श्रावक के 12 वर्तो मे 14 प्रकार की वस्तु साधु संतों को निर्दोष भाव से देना चाहिए विशाल समकित परिवार से जुड़कर संघ सेवा करते हैं आगम में भी इसका वर्णन आता है देवता भी फाइट करते हैं जब अपना स्वार्थ कमजोर पर जाता है फाइट में देखने वाले भी आते हैं कोई तमाशा देखते हैं तो कोई झगड़ा सुलझाने में आते हैं जो झगड़ा समाप्त करते हैं उनका इतिहास बनता है जो मजे लेता है उसको मोहनी कर्म का बंधन होता है। उप प्रवर्तक चंद्रेश मुनि जी महारा साहब एवं पूज्य प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी महारा साहब ने भी धर्म सभा को संबोधित किया।
इस पावन अवसर पर अखिल भारतीय जैन दिवाकर संगठन समिति द्वारा श्री समरथमल ओस्तवाल एवं समीरमल चत्तर को जैन दिवाकर रत्न से अलंकृत राकेश मेहता ,सुजानमल कोचट्टा, सुशील चपड़ोद ,विनोद लूनिया दिलीप चत्तर ,फतेहलाल बुरड ने किया चत्तर परिवार का बहूमान समकित परिवार व नाकोड़ा परिवार ने किया कल कालूखेड़ा जैन दिवाकर कस्तूर स्थानक भवन का लोकार्पण गुरुदेव के पावन सानिध्य में होगा कार्यक्रम का संचालन श्री संघ के पूर्व महामंत्री सुभाष टुकड़िया ने किया।

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