
इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। बिहार के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के ज्ञापन पर की कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मध्यप्रदेश के पुर्व मुख्यमंत्री वर्तमान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर वैशाली स्थित प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग में ही बनाए रखने का पत्र लिखकर आग्रह निवेदन किया है। लिखे पत्र में चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के ज्ञापन से मुझे अवगत कराया गया है कि संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर कला, संस्कृति एवं संग्रहालय निदेशालय को हस्तांतरित करने का सरकार ने निर्णय लिया गया है। शिवराज जी ने आशंका जताई कि इससे संस्थान की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और इसकी मूल पहचान प्रभावित होगी।
इस ऐतिहासिक संस्थान का 1956 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था शिलान्यास
केंद्रीय मंत्री ने पत्र में स्मरण कराया कि इस संस्थान का शिलान्यास भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 1956 में किया था। यह देश की सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है। प्राकृत भाषा, जैन दर्शन , संस्कृति एवं अहिंसा के क्षेत्र में इस संस्थान ने अनेक विद्वानों को तैयार कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। बिहार के माननीय मुख्यमंत्री से किया आग्रह शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री से पुनर्विचार कर गंभीर परीक्षण करने, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने तथा संस्थान को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट शोध केंद्र बनाने की दिशा में पहल करने का आग्रह किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार संवेदनशीलता एवं दूरदर्शिता से निर्णय लेगी, जिससे अमूल्य सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे।
भारत वर्षीय जैन समाज ने जताया आभार
केंद्रीय मंत्री के इस पत्र पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ सहित सकल जैन समाज ने आभार व्यक्त किया है। प्राकृत भाषा के विद्वानों ने भी इस पहल का स्वागत किया है।