मिट्टी परीक्षण से बढ़ रही प्राकृतिक खेती की गुणवत्ता

स्वाईल हैल्थ कार्ड से किसानों को मिल रही संतुलित पोषण की जानकारी

रतलाम । उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री आर के सिंह ने बताया कि रतलाम जिले को शासन स्तर से वर्ष 2026-27 हेतु 6615 मिट्टी नमूनों के परीक्षण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 3650 नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं। विकासखंड स्तर पर स्थित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं, मंडी रतलाम एवं युवा उद्यमी संस्थाओं द्वारा मिट्टी परीक्षण कर किसानों को फसल की आवश्यकता अनुसार संतुलित पोषक तत्वों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही किसानों को निःशुल्क स्वाईल हैल्थ कार्ड भी प्रदान किए जा रहे हैं।
स्वाईल हैल्थ कार्ड में मिटटी को स्वस्थ एवं उर्वर बनाये रखने हेतु निम्न कार्याे को खरीफ के पूर्व किये जाने की मिटटी परीक्षण प्रयोगशालाओं /युवा उद्यमी संस्थाओं द्वारा अनुशंसाएं दी जा रही हैं ,मुख्य फसल से पहले हरी खाद या मल्टीवेरिएट क्रॉपिंग अपनाकर मिट्टी में प्राकृतिक बायोमास बढ़ाएं। बीज बोने से पूर्व बीजोपचार बीजामृत से करें, जिससे बीजजनित रोगों की रोकथाम एवं शीघ्र माइक्रोबियल कॉलोनाइजेशन होता है। घनजीवामृत/6000 किग्रा प्रति हेक्टेयर को बेसल एप्लीकेशन के रूप में मिट्टी में मिलाएं, जिससे ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है तथा पोषक तत्व धीरे-धीरे उपलब्ध होते हैं। जीवामृत/2500 लीटर प्रति हेक्टेयर का माह में दो बार सिंचाई अथवा 10 प्रतिशत पत्तियों पर स्प्रे करें, जिससे माइक्रोबियल गतिविधि एवं पोषक तत्वों के घुलनशीलकरण को बढ़ावा मिलता है। जैविक खाद के रूप में एफवाईएम 8 टन प्रति हेक्टेयर, कम्पोस्ट/एनरिच्ड कम्पोस्ट 3 टन प्रति हेक्टेयर, वर्मी कम्पोस्ट 1.5 टन प्रति हेक्टेयर, ऑयल केक (नीम/कैस्टर/करंज) 0.4 टन प्रति हेक्टेयर तथा बायोफर्टिलाइजर राईजोबियम/एजोबैक्टर/पीएसबी 2 किग्रा प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें।
किसान भाइयों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी कृषि विस्तार अधिकारी एवं वरिष्ठ विकास अधिकारी से संपर्क कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाएं।

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