


गंगा दशहरा पर माताजी की आरती व पूजा कोई धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है, अपितु आदि सनातन काल से हिंदू धर्म में प्रकृति व जल के प्रति उसके महत्व, उपयोगिता तथा संचय की भावना को लेकर के जो मानव समाज के लिए कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं ,उस कड़ी में बनाई गई यह एक उपकार परंपरा है। जिसका निर्वाह करते समय मनुष्य को ईश्वर की इस अनमोल देंन के प्रति स्मरण कराया जाता है। आज के समय में इस त्यौहार का और भी ज्यादा महत्व पर बढ़ गया है जब इस ग्रीष्म ऋतु में प्रत्येक प्राणी मात्र को जल की आवश्यकता का अनुभव होता है। उसे वह पूरे वर्ष भर याद रख सके। यह बात सनातन धर्म सभा अध्यक्ष अनिल झालानी ने गंगा दशमी के पूजन के अवसर पर कही।
सनातन संस्कृति में प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी पर परंपरागत रूप से मनाया जाने वाले गंगा दशमी के त्यौहार पर आज प्रात: गंगा माता की पूजन अर्चन की गई।
श्री सनातन धर्म महिला मंडल के तत्वावधान में महिला मंडल की सदस्याओं ने श्री शंकराचार्य जी की मंदिर से त्रिवेणी कुंड तक जाकर विधि विधान से गंगा माता को चुनरी उड़ाते हुए श्रृंगार कर तथा जल कलश पूजन कर गंगा मैया की आरती उतारी गई।
इस अवसर पर सनातन धर्म महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती रजनी व्यास संरक्षक द्वय श्रीमती तारा बहन सोनी एवं श्रीमती हंसा व्यास, श्रीमती आशा शर्मा, किरण सोनी, किरण कड़ेल, सावित्री सोनी, अंजू सोनी, सुनीता पाठक ,कौशल्या त्रिवेदी, हेमा निरंजनी, अनीता सोलंकी, कोकिला ओझा, भावना व्यास, अलका व्यास, कीर्ति व्यास, किरण ओझा, नीमा व्यास, दिव्या दवे, ऊषा दवे आदि अनेक महिलाएं उपस्थित थी ।
कार्यक्रम का आयोजन सनातन धर्म सभा उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र शर्मा महामंत्री नवनीत सोनी, सुरेश दवे, जुगल पंड्या, जनक नांगल, अरविंद सोनी आदि के सान्निध्य में धर्ममय वातावरण में प्रसादी वितरण के साथ संपन्न हुआ। जिसे पंडित श्री संजय ओझा, पं. श्री दीपक परसाई व पं. श्री मनीष ओझा के द्वारा सम्पन्न कराया गया।