“आयंबिल आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की ओर बढ़ने का सशक्त माध्यम है” – नवकार मेहता

सुखेड़ा जावरा (नि.प्र.) । जैन समाज की प्रतिष्ठित संस्था नवरत्न परिवार सुखेड़ा द्वारा इस वर्ष करूणा दिवस (कल) के अवसर पर प.पू. आगमोद्वारक सूरिजी के समुदाय वर्ती प.पू मनोहर-इन्दू-हेमप्रभाश्रीजी म.सा की शिष्या पूज्य सलीला प. पू. हेम प्रज्ञाश्रीजी म.सा की निश्रा में आयंबिल तप का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में अब तक 60 से अधिक श्रद्धालु संयम और आत्मशुद्धि की भावना से तप में लीन हैं।
श्री नवरत्न परिवार के जिला सचिव नवकार मेहता ने कहा कि, “आयंबिल केवल शरीर का संयम नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की ओर बढ़ने का सशक्त माध्यम है।” उन्होंने इस आयोजन को जैन समाज की तप परंपरा और सेवा भावना का सुंदर उदाहरण बताया।
आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था राजेश चन्द्रावत, नवकार मेहता, विकास चन्द्रावत, अक्षय सेकावत, मनन चन्द्रावत एवं शुभम बोहरा के नेतृत्व में हो रही है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों को इस सात्विक तप में भाग लेने के लिए प्रेरित किया है।
इस आयोजन को सफल बनाने में श्री आदिनाथ जैन श्री संघ सुखेडा, नवरत्न परिवार सुखेड़ा,नवरत्न परिवार सुखेड़ा, श्री आदिनाथ महिला मंडल सुखेड़ा सहित कई मंडल तन-मन से जुटे हुए हैं। इस तप आयोजन को सफल बनाने में जावरा के श्री अशोक झामर एवं श्री राजकुमार हरण का सहयोग भी सराहनीय रहा। ये सभी तपस्वियों को सात्विक भोजन, शांत वातावरण और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं।
आयंबिल के अंतर्गत श्रद्धालु बिना मसाले, तेल घी व स्वादवर्धक पदार्थों के सात्विक भोजन के साथ संयमपूर्वक दिनचर्या का पालन करते हैं। साथ ही, प्रार्थना, ध्यान और स्वाध्याय के माध्यम से आत्मा की ओर उन्मुख हो रहे हैं। सुखेड़ा में हो रहा यह आयोजन जैन समाज की धार्मिक निष्ठा, सेवा भावना और तप परंपरा का जीवंत उदाहरण बनने जा रहा है।

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