नेत्रदान बना मानवता का महादान : ठाकुर सा. नारायण सिंह कुंपावत ने मृत्यु उपरांत भी दी रोशनी की सौगात

रतलाम। “मृत्यु अंत नहीं, किसी के जीवन में नई रोशनी की शुरुआत भी बन सकती है” — इसी प्रेरणादायक संदेश को सार्थक करते हुए मां गायत्री हॉस्पिटल रतलाम के डॉ. जितेंद्र सिंह कुंपावत के पूज्य पिताजी ठाकुर सा. नारायण सिंह कुंपावत के देवलोकगमन उपरांत उनके परिजनों द्वारा नेत्रदान का अनुकरणीय निर्णय लिया गया।
नेत्रदान के इस पुण्य कार्य के पीछे नेत्रम संस्था से जुड़े समाजसेवी सुशील मीनु माथुर, अमित नागर एवं गिरधारीलाल वर्धानी की प्रेरणादायी भूमिका रही। नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत ने जानकारी देते हुए बताया कि परिजनों की सहमति प्राप्त होते ही रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचना दी गई। उनके निर्देशन में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाहा ने दिलीप डामोर एवं संतोष भाभर के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि संपूर्ण प्रक्रिया को समयबद्ध एवं व्यवस्थित रूप से पूर्ण कराने हेतु नेत्रम संस्था के सदस्य सुशील मीनु माथुर ने अपनी निजी वाहन व्यवस्था से टीम को दिवंगत के निवास स्थान से मेडिकल कॉलेज तक पहुँचाने एवं वापस लाने की जिम्मेदारी निभाई।
यह प्रेरणादायक नेत्रदान समाज के लिए एक जीवंत संदेश है कि व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम क्षणों के बाद भी किसी की अंधेरी दुनिया में उजाला भर सकता है। नेत्रम संस्था लंबे समय से जनजागरण के माध्यम से नेत्रदान महादान का संदेश समाज तक पहुँचा रही है।
इस अवसर पर नेत्रम संस्था के गिरधारीलाल वर्धानी, नवनीत मेहता, शीतल भंसाली, शलभ अग्रवाल,सुशील मीनु माथुर, प्रवीण गुप्ता एवं अमित नागर उपस्थित रहे।

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