जिसके जीवन में आध्यात्मिकता नहीं उसका जीवन शून्य है – आदित्य सागर जी

छत्रपति नगर । दुनिया स्वार्थी है कोई किसी का नहीं होता जिसे आप अपना मानते हो वह भी आपका नहीं है। आज ज्यादातर लोग दिखावे के लिए कार्य करते हैं। आज महंगाई नहीं बड़ी है लोगों के शौक बढ़ गए हैं। जीवन में आपने जो कुछ किया और जोड़ा वह किस के लिए है? तुमने जो किया है वही लौट कर आएगा। यह उद्गार आज श्रुत संवेगी महाश्रमण आदित्य सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में व्यक्त किये।आपने आगे कहा कि जब मृत्यु आएगी तब न धन काम आएगा न रिश्तेदार काम आएंगे।
जो बुरे वक्त में काम आए वही सच्चा साथी है। आध्यात्मिकता शांति में है। समाज के बीच में रहकर जीवन धर्म और अध्यात्म के साथ जीवन जिएं।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री ने देश में होने जा रही जनगणना के संबंध मे कहा कि जैनों की संख्या देश में आज भी चार करोड़ से कम नहीं है केवल सरकारी आंकड़े 40 लाख बताते हैं जो सही नहीं है। आपने समाज से जागरूक रहकर अनिवार्य रूप से जनगणना फॉर्म भरते समय अपने नाम के साथ धर्म के कालम में सिर्फ और सिर्फ जैन लिखने का आह्वान किया ताकि सरकारी रिकॉर्ड में जैनो की सही संख्या दर्ज हो सके।
प्रारंभ में तुकोगंज दिगंबर जैन समाज के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री लुहाडिया एवं गौरव अध्यक्ष श्री हंसमुख गांधी,सीए श्री अशोक खासगीवाला,विकास जैन आदि ने आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के चित्र का अनावरण एवं चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर धर्म सभा का शुभारंभ किया आचार्य श्री का पूजन श्री अतुल जैन नीलेश जैन एवं जिनेश जैन सुपारी वालों ने किया। इस अवसर पर डॉ जैनेंद्र जैन, डॉ वीसी जैन, देवेंद्र सोगानी, ऋषभ पाटनी, राहुल स्पोर्ट्स अशोक अजमेरा सुरेश पड़ोसी, डी एल जैन अखिलेश सोधिया आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने किया।

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