करुणा दिवस पर जीवदया, तप एवं सेवा भावना का अनुपम संगम, लगभग 150 सामूहिक आयंबिल तप सम्पन्न

साध्वी श्री संजयप्रभा जी म.सा. के प्रेरक प्रवचन से श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

सुवासरा (नयन जैन) । गुरुवार को करुणा दिवस के पावन अवसर पर अबोल एवं निरपराध पशु-पक्षियों की शाता, सुरक्षा एवं जीवदया की मंगल भावना को लेकर समाज द्वारा एक दिवसीय सामूहिक आयंबिल तप का अत्यंत भव्य, प्रेरणादायी एवं धर्ममय आयोजन सम्पन्न हुआ। इस पुण्य आयोजन में समाज के श्रावक-श्राविकाओं, युवाओं एवं वरिष्ठजनों ने बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। जीवमात्र के कल्याण एवं विश्व शांति की मंगल कामना के साथ लगभग 150 आयंबिल तप संपन्न हुए। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण तप, संयम, करुणा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत बना रहा।
स्थानक भवन में विराजित पूज्य साध्वी श्री संजयप्रभा जी म.सा. ने अपने प्रेरणादायी एवं ओजस्वी प्रवचनों में जीवदया के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि — “धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, संवेदना और संरक्षण का भाव रखना ही सच्चा धर्म है। अबोल पशु-पक्षियों की सेवा एवं रक्षा करना मानव जीवन का श्रेष्ठ कर्तव्य है।” उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ती संवेदनहीनता पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज को जीवमात्र के प्रति दया, सेवा एवं सह-अस्तित्व की भावना अपनाने का संदेश दिया। प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर धर्मआराधना एवं जीवदया के महत्व को आत्मसात करते दिखाई दिए।
पंकज जैन डाबर ने जानकारी देते हुए बताया कि आयंबिल तप का संपूर्ण लाभ राजकुमार जैन दलाल परिवार द्वारा अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से लिया गया। इस अवसर पर लाभार्थी परिवार का वरिष्ठ श्रावक श्राविकाओं द्वारा बहुमान किया गया।लाभार्थी परिवार के धर्म आराधना के इस पुण्य आयोजन में तन-मन-धन से सहयोग प्रदान कर प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया गया। साथ ही विभिन्न लाभार्थियों द्वारा श्रद्धालुओं को प्रभावना वितरित कर धर्मलाभ अर्जित किया गया। आयोजन में समाज के अनेक गणमान्यजन, महिला मंडल, युवा वर्ग एवं श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
करुणा दिवस पर आयोजित यह सामूहिक आयंबिल तप केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि समाज में जीवदया, सेवा, संयम एवं मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने वाला प्रेरणास्पद संदेश बनकर उभरा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म एवं करुणा के मार्ग पर चलता है, तब न केवल आत्मकल्याण होता है, बल्कि समस्त जीव जगत के प्रति सकारात्मक चेतना का संचार भी होता है।

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