
जावरा (अभय सुराणा) । नगर के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री रमेश मनोहरा की 39 वी पुस्तक के रूप मे दोहा सग्रह ” डसता है चुपचाप ” का विमोचन अटल ग्राम विकास सामाजिक संगठन एवं समग्र मालवा द्वारा आयोजित मालवा विचार मंथन कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ रंगकर्मी श्री ओम प्रकाश मिश्रा, आनंद व्यास तथा श्री चंद्र प्रकाश ओस्तवाल के हाथों श्री राम विद्या मंदिर में संपन्न हुआ।
संस्था अध्यक्ष अभय कोठारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रकाश उपाध्याय, राजेंद्र श्रोत्रिय, डॉ. सी.एम .मेहता,मनोहर सिह चौहान मधुकर, जगदीश उपमन्यु, राजेंद्र त्रिवेदी आदि ने श्री रमेश मनोहरा का स्वागत किया तथा स्मृति चिन्ह भेट किया ।
उल्लेखनीय है की श्री रमेश मनोहरा के अब तक 20 कविता संकलन , 14 कहानी संकलन , दो लघु कथा संकलन , दो व्यंग्य संकलन और एक नाटक संकलन का प्रकाशन हो चुका है । श्री मनोहरा की प्रथम पुस्तक का विमोचन 2003 में श्री सूर्यकांत नागर के हाथो संपन्न हुआ था । उसके बाद इंदौर ,उज्जैन, रतलाम, जबलपुर, नाथद्वारा ,पानीपत आदि स्थानों पर भी आपकी पुस्तकों का विमोचन हो चुका है ।
देश के प्रख्यात साहित्यकार श्री अजहर हाशमी, शैलेंद्र शर्मा ,डॉ.पंकज शाह आदि ने आपकी पुस्तकों का विमोचन किया है ।
जावरा मे जन्मे 76 वर्षीय श्री मनोहरा ने 7 जून को अपना 76 जन्मदिन सादगी पूर्ण ढंग से मनाया। श्री रमेश मनोहरा की पुस्तकों में घायल प्रजातंत्र ,हजामत, देश का नसीब ,मुर्गे की टांग एवं ऑडिट, औरत एक चट्टान , आडे तीरछे तीर, नागफली के जंगल, आज का जनतंत्र और कल की आजादी, आस्तीनों का सांप ,सिद्ध हस्त भिखारी , जहरीली नागिन , आडे तिरछे तीर, कंक्रीट का जंगल आदि शामिल है । इसी प्रकार कहानी संकलन के रुप मे युद्ध का अंत, गिरे हुए लोग ,औपचारिक रिश्ते ,इंसान में छिपा चेहरा , पिंजरा, भूखे पशु, अंधविश्वास की जडे, घर में पाला सांप । व्यग्ग के रूप मे उल्लू का चिंतन और कुर्सी की करामात आदि प्रमुख है । 1972 से लेखन मे सक्रिय श्री मनोहरा जी पुस्तकों का पंजाबी राजस्थानी और मराठी भाषा में भी अनुवाद हो चुका है । श्री रमेश मनोहरा को जेमीनी अकादमी पानीपत, साहित्य मंडल नाथद्वारा, साहित्य कला संस्कृति संस्थान हल्दीघाटी तथा मध्य प्रदेश लघु कथाकार परिषद द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है। श्री मनोहरा के साहित्य संकलन में से कुछ पुस्तकों का पंजाबी राजस्थानी एवं मराठी भाषा में अनुवाद भी हो चुका है । श्री रमेश मनोहरा देश भर की साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में निरंतर छपने वाले साहित्यकार हैं तथा आपकी रचनाओं को पत्र पत्रिकाओं में प्रमुखता से स्थान दिया जाता है।