रानी दुर्गावती शहादत दिवस एवं आदिवासियों मसीहा दिलीपसिंह भूरिया का स्मृति दिवस मनाया गया

रतलाम। ग्राम मोरवानी में रानी दुर्गावती शहादत दिवस एवं आदिवासियों मसीहा दिलीपसिंह भूरिया स्मृति दिवस मनाया गया। आदिवासी एकता परिषद ,अखिल भारतीय भील समाज ,जय आदिवासी युवा शक्ति ,आदिवासी छात्र संगठन, वीर एकलव्य आदिवासी सामाजिक सेवा संस्था ,महाराणा पूजा भील जनकल्याण संगठन, मध्यप्रदेश अजाक्स संगठनके सयुक्त तत्वाधान में रानी दुर्गावती शहीद दिवस एवं स्वर्गीय दिलीप सिंह जी भूरिया स्मृति दिवस श्रद्धा पूर्वक मनाया गया।
सर्वप्रथम डॉ भीमराव अंबेडकर बिरसा मुंडा रानी दुर्गावती दिलीप सिंह जी भूरिया टंट्या भील आदि महापुरुषों की पूजा अर्चना कर प्रार्थना की गई। सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि रानी दुर्गावती गोंडवाना राज्य की महान रानी थी इनका जन्म 5 अक्टूबर 1924 को बांद्रा जिले के कालिंजर किले में हुआ तथा 24 जून 1564 मुगल सेना से लड़ते हुए उन्होंने आत्म सम्मान की रक्षा के लिए खुद अपनी तलवार से सीने में उतार ली और वे शहीद हो गई 16 साल तक शासन किया 52 युद्ध लड़े जिसमें से 51 युद्ध में विजय प्राप्त की।
ऐसी महान वीरांगना को कोटि-कोटि नमन तथा आदिवासी समाज के जननायक महान दिलीप भूरिया जिन्होंने देश के कोने-कोने में जाकर आदिवासियों के जल ,जंगल, जमीन, प्रकृति और पर्यावरण के संवैधानिक अधिकारों के लिए जनजागृति संदेश देकर उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट करके एक जाजम पर बिठाया और आदिवासी समाज के लिए पेसा एक्ट (पेसा कानून) बनाया । ऐसे महान क्रांतिकारी आदिवासियों के मसीहा को समूचा समाज कोटि-कोटि नमन वंदन करते हुए याद किया गया। इस प्रकार से समाज में जन जागृति संदेश पहुंचकर समाज को एक जाजम पर बिठाने के लिए संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि गीताबाई भाबर सरपंच (ग्राम पंचायत मोरवानी )नागजी भाभर, कमल भाभर , विशेष अतिथि नाथू भाभर ,राधाबाई सिंगाड़ , रामकन्या बाई सिंगार, ममताबाई, मीराबाई गरवाल, चंपाबाई हाडा, कैलाशी बाई समाजजन , पूजा भाई, अंकित सिंगर पीयूष सिंगर योगेश सिंगड़ नरेश हाडा, अनीताबाई गीताबाई सीताबाई रीतबाई समाजसेवी सूरतलाल डामर आदि बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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