वडनगर (गुज.) 24 अप्रैल 2021। संकटकालीन दौर में इंसान लूट कर छीन कर कर्जा करके क्षेत्र छोड़कर उधारी से भी अपनी पूर्ति कर सकता है लेकिन हमारे अनंत उपकारी मूक प्राणी अपनी पीड़ा भी व्यक्त नहीं कर सकते । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने बडनगर गुजरात गौशाला में अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली द्वारा आयोजित 42 वे दीक्षा जयंती 3 दिवस समापन समारोह पर संबोधित करते कहा कि पशुओं के बिना इंसान अपने जीने की कल्पना तक नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संकट काल दौर में गौशालाओं में दानदाता नहीं पहुंच पा रहे हैं सरकार का भी ध्यान नहीं है घास के अभाव में गौमाता दम तोड़ रही है गौशाला संचालक गाय छोडऩे को मजबूर हो रहे हैं
राष्ट्रसंत कमलेश ने स्पष्ट कहा कि एक प्राणी की जान बचाना तीन लोक के संपत्ति से बड़ा दान है अभय दान सर्वश्रेष्ठ दान है ।
राष्ट्रसंत ने बताया कि हीरे पन्ने माणक मोती से भी पशुधन अनमोल है जिसका कोई विकल्प नहीं है उसकी रक्षा करना इस धर्म और भगवान की रक्षा कर के समान है।
जैन संत ने केंद्र और सरकारों से आह्वान किया कि संकटकाल इंदौर में गौशालाओं के लिए विशेष अनुदान की घोषणा करनी चाहिए मुनि कमलेश के आवाहन पर विसनगर के दानवीर श्री बाबूलाल जी लो ढा ने दीक्षा जयंती के उपलक्ष में तीन लाख 51 हजार की तत्काल नकद राशि प्रदान की दिवाकर मंच की ओर से उनका अभिनंदन किया गया विसनगर में महावीर जयंती पर कोविड-19 पूरे विश्व से मुक्त बने उसके लिए महामंत्र नवकार का अखंड जाप रखा गया है ।