रतलाम। मध्य प्रदेश शासन की नीति के अनुसार विभिन्न जिलों से स्थानांतरित होकर रतलाम आ रहे शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले दो दर्जन से अधिक प्राथमिक शिक्षक एवं सहायक शिक्षक इन दिनों पदस्थापना के लिए कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आरोप है कि पोर्टल पर जो रिक्त स्थान दिखाए गए थे, उन स्थानों पर शिक्षकों की पदस्थापना नहीं की जा रही है, जिससे सैकड़ों महिला और पुरुष शिक्षक भ्रमित और परेशान हो रहे हैं।
नियम और व्यवस्था के अनुसार, विभाग को कार्यालय के सूचना पटल (नोटिस बोर्ड) पर यह जानकारी चस्पा करनी चाहिए थी कि किस विद्यालय में कौन से पद रिक्त हैं। लेकिन सहायक आयुक्त कार्यालय द्वारा ऐसी कोई सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। सूची के अभाव में दूर-दराज के जिलों से ट्रांसफर होकर आए शिक्षक भटक रहे हैं और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि उनके लिए कौन सा विकल्प खाली है। शिक्षकों की इस गंभीर समस्या को लेकर मध्य प्रदेश शिक्षा संघ मैदान में आ गया है। संघ के पदाधिकारियों ने विभाग के इस ढुलमुल रवैए पर गहरी आपत्ति जताई है।
संघ के सह-संगठन मंत्री सर्वेश कुमार माथुर, जिला अध्यक्ष गोपाल उपाध्याय, जिला संगठन मंत्री बद्दी लाल मुंडोतिया, जिला सचिव जितेंद्र सिंह चौहान, तहसील अध्यक्ष रमेश परमार, तहसील अध्यक्ष संजय उपाध्याय, एफ.एम. बैरागी, दिनेश जायसवाल सौरभ गुप्ता संजय द्विवेदी और संजय द्विवेदी गोविंद व्यास सोनिका व्यास ललिता कदम रंजीत परमार, सुखदेव शर्मा, पंकज कुमार दोहरे, सविता कारपेंटर एवं मोहन सिंह आदि ने प्रशासन से मांग की है कि: ”पारदर्शिता अपनाते हुए विभाग के सभी रिक्त स्थानों की सूची तुरंत कार्यालय के सूचना पटल पर चस्पा की जाए, ताकि भटक रहे शिक्षकों को राहत मिल सके और वे सही स्थान पर अपनी जॉइनिंग दे सकें।” शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द ही सूची जारी कर न्यायसंगत पदस्थापना नहीं की गई, तो संगठन को आगे की रणनीति तय करने पर मजबूर होना पड़ेगा।