व्यापार की तरह धर्म के क्षेत्र में भी करें वृद्धि: महिमा श्री म.सा.

रतलाम 11 जुलाई । काटजू नगर जैन उपाश्रय में आयोजित चातुर्मासिक व्याख्यान माला के तहत पूज्य प्रफुल्ला श्री जी म.सा. एवं द्विशतावधानी श्री महिमा श्री जी म.सा. के अमृतमयी प्रवचनों का आयोजन हुआ। प्रवचन में श्रावक- श्राविकाओं को आत्म-चिंतन और सामायिक के महत्व को गहराई से समझाया गया।
पूज्य प्रफुल्ला श्री म.सा. ने पुण्य के दो प्रकारों—आरंभी पुण्य और अनारंभी पुण्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उपाश्रय निर्माण, अन्नदान, वस्त्रदान और साधर्मिक भक्ति जैसे कार्य आरंभी पुण्य हैं, जिनमें आरंभ-समारंभ होता है। इससे संसार में भौतिक सुख-सुविधाएं और लक्ष्मी तो प्राप्त हो सकती हैं, लेकिन मन का सुकून और शांति केवल अनारंभी पुण्य से ही मिलती है। सामायिक, सत्संग श्रवण और सुपात्र दान अनारंभी पुण्य हैं, जो जीव को मोक्ष तक ले जाने की असली चाबी हैं। आरंभी पुण्य के उदय से सुंदर मकान मिल सकता है, पर उस मकान में शांति अनारंभी पुण्य से ही संभव है।
महासतिया जी ने कहा की “जैसे पुलिस की वर्दी के बिना उसका रौब नहीं होता, वैसे ही बिना प्रत्याख्यान (नियम) के हम प्रभु के अनुशासन में नहीं बंध पाते। जब हम सांसारिक रिश्तों और मोह के बंधनों में बंधने को तैयार हैं, तो प्रभु के पावन बंधन से क्यों कतराते हैं?” उन्होंने आगे कहा कि बिना लगाम के गधे की कोई कीमत नहीं होती, जबकि लगाम वाला घोड़ा मूल्यवान होता है। सामायिक हमारे जीवन में उसी लगाम के समान है, जो हमें संसार के प्रपंचों और निगोद के दुखों से मुक्ति दिलाती है। जैसे भटकने वाली आत्मा की कोई प्रतिष्ठा नहीं होती, वैसे ही सामायिक के बिना भटकते मन की कोई कीमत नहीं है। अब दूसरों के बजाय अपनी आत्मा के बारे में चिंतन करने का समय आ गया है। भगवान महावीर ने भी पुनिया श्रावक जैसी निष्काम सामायिक करने की प्रेरणा दी है। जैसे घड़ी में एक बार चाबी भरने से वह 24 घंटे चलती है, वैसे ही दिन में की गई एक सामायिक पूरे दिन मन को शांत रखती है।
धर्म सभा को सम्बोधित करते हूए द्विशतावधानी महिमा श्री म.सा. ने फरमाया कि द्रव्य सामायिक भले ही 48 मिनट की होती है, लेकिन हमारा लक्ष्य पूरे दिन ‘भाव सामायिक’ में रहने का होना चाहिए। क्या हमारे पास पूरे दिन में अपनी आत्मा के कल्याण के लिए मात्र 48 मिनट भी नहीं हैं? यह अवसर केवल मनुष्य जन्म में ही सुलभ है। उन्होंने आह्वान किया कि जैसे हम व्यापार में दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की चाहते हैं, वैसे ही धर्म और आत्मा के क्षेत्र में भी निरंतर वृद्धि का प्रयास करें।
काटजू नगर जैन उपाश्रय में रविवार को ‘सामायिक दिवस’ के रूप मे मनाते सुबह 09:00 से 10:00 बजे तक विशेष प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। श्री संघ ने सभी धर्मालुओं से समय पर उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।