जीवन में सम्यक्त्व लाना है, तो अपनाएं सही दृष्टि और समता भाव : महासती प्रफुल्लाश्री म.सा.

रतलाम 16 जुलाई । पूज्य प्रफुल्लाश्रीजी म.सा. ने धर्म सभा में भगवान महावीर के गुणों का बखान करते हुए जीवन में ‘सम्यक्त्व’ (सही दृष्टि और समता भाव) के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान महावीर सबके लिए एक समान थे—चाहे वह गौतम स्वामी हों, चंदनबाला हों, गोशालक हो या प्रभु को कष्ट देने वाला संगम देव। प्रभु के गुणों का कोई पार नहीं है, उनके सामने संसार की सभी उपमाएँ छोटी हैं।
महासतिया जी ने फरमाया कि यदि जीवन में सम्यक्त्व (समता भाव) नहीं है, तो महीनों का किया गया ‘मासक्षमण’ जैसा कड़ा तप भी केवल ‘बाल तप’ बनकर रह जाता है। इसके विपरीत, यदि भीतर सम्यक्त्व भाव है, तो एक छोटा सा उपवास भी आत्मा को तारने वाला बहुत बड़ा तप बन जाता है। यह सब मानने और न मानने के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है—”मानो तो मैं गंगा माँ हूँ, ना मानो तो बहता पानी।”
पूज्य मासा ने बताया की भगवान महावीर ने चंदनबाला के रूखे-सूखे उड़द के बाकुले भी अत्यंत सम्यक्त्व और समता भाव से ग्रहण किए थे। भोजन करते समय कभी क्लेश या नखरे नहीं करने चाहिए। यदि कोई क्रोध में आकर भोजन छोड़कर उठ जाता है, तो वह नारकीय कर्मों का बंधन करता है। वहीं, समता भाव से की गई एक ‘नवकारसी’ भी जीव को मुक्ति के मार्ग पर ले जा सकती है। परेशानियों को सहकर भी मुस्कुराना सीखें, क्योंकि दुनिया में बुजदिलों की कदर नहीं होती; मुस्कुराने वालों के साथ ही पूरा काफिला चलता है। जीवन को मजबूरी में नहीं, बल्कि जिंदादिली से जिएं। मन की थकान इंसान को जीते जी मार देती है।
आपने कहा की जिस प्रकार बैंक का कैशियर दिनभर करोड़ों रुपये गिनता है या नर्स मरीज की देखभाल करती है, लेकिन ड्यूटी खत्म होते ही वे बिना किसी मोह के अपने घर लौट आते हैं, ठीक वैसे ही संसार में रहिए। सोना तिजोरी में मखमल के कपड़े पर आराम करता है और इंसान रात-दिन उसकी चौकीदारी में अपनी नींद खो देता है। संसार में अपना कर्तव्य पूरी शिद्दत से निभाएं, लेकिन किसी से अंधा लगाव या ममत्व न रखें। यदि मन थकने लगे, तो संयम अंगीकार करें या घर में रहकर ही संयमी जीवन जिएं। दुनिया की चकाचौंध को जरूर देखें, लेकिन उसमें खो न जाएं। टीवी पर विज्ञापन देखकर चीजें पाने की अंतहीन लालसा पैदा न करें। सम्यक्त्व का मूल यही विचार है कि—”जो प्राप्त है, वह पर्याप्त है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Play sound