

रतलाम। डॉ लक्ष्मीनारायण पाण्डेय शासकीय मेडिकल कॉलेज, रतलाम के संस्थापक अधिष्ठाता डॉ. संजय दीक्षित, मेडिकल कॉलेज की संस्थागत एथिक्स समिति की बैठक में अध्यक्ष के रूप में गुरुवार दिनांक 16 जुलाई को सम्मिलित होने हेतु रतलाम पहुंचे।
मेडिकल कॉलेज आगमन पर अधिष्ठाता डॉ. अनीता मुथा ने उनका पौधा से आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर श्री गोविंद काकाणी, प्रो. डॉ. वास्तोष्पति शास्त्री उपाध्यक्ष, डॉ. जगदीश हुंडकारी सचिव, डॉ. ध्रुवेन्द्र पाण्डेय सह सचिव, श्री नीरज बरमेचा, डॉ रंजिता अस्के, डॉ प्रीति कोरी, डॉ मोहित कुल्मी, डॉ स्मृति पाण्डेय सहित समिति के अन्य सदस्य एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ अनीता मुथा द्वारा कहा गया की डॉ. संजय दीक्षित के अध्यक्ष मनोनीत होने से एथिक्स कमेटी के कार्यों को नए आयाम मिलेगी एवं इस संस्थान के अनुसंधान की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होगी।
माननीय अध्यक्ष डॉ संजय दीक्षित द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि सभी को गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (GCP) एवं आईसीएमआर एथिकल स्टैंडर्ड्स 2017 की गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य हैं । मरीजों के हितों का ध्यान रखते हुए उन्हें उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा प्रदान करना हमारा प्रथम उद्देश्य होना चाहिए ।
संस्थागत एथिक्स समिति का मुख्य उद्देश्य मेडिकल कॉलेज में हो रहे समस्त अनुसंधानों एवं UG एवं PG विद्यार्थियों द्वारा की जाने वाली थीसिस अथवा शोध की निगरानी करना एवं मरीजों के हितों के बारे में नैतिक पहलू का ध्यान रखना होता हैं । सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक चली बैठक में फैकल्टी, सीनियर रेजिडेंट्स एवम पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स के कुल 38 (मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, कम्युनिटी मेडिसिन, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, एनेस्थीसिया, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं अन्य) अनुसंधान प्रस्तावों एवं नैतिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई तथा चिकित्सा अनुसंधान में उच्च नैतिक मानकों के पालन पर बल दिया गया।
बैठक के उपरांत प्रस्थान से पूर्व डॉ. संजय दीक्षित ने मेडिकल कॉलेज परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। इस अवसर पर उनके साथ अधिष्ठाता डॉ. अनीता मुथा, अधीक्षक डॉ प्रदीप मिश्रा, डॉ प्रफुल्ल सोनगरा, प्रो. डॉ. वास्तोष्पति शास्त्री, नीरज बरमेचा तथा श्री गोविंद काकाणी भी उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिसर के निर्माण का संकल्प व्यक्त करते हुए अधिकाधिक वृक्षारोपण का संदेश दिया।
संस्थागत एथिक्स समिति द्वारा अभी तक कुल 200 से अधिक अनुसंधान की अनुमति प्रदान की जा चुकी है एथिक्स के मानकों को पूर्ण रूप से पालन किया जाना सुनिश्चित किया गया है।