हाइड्रोजन ट्रेन: भारत में हरित रेलवे क्रांति की ओर एक बड़ा कदम


रतलाम 21 जुलाई। भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है। कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय रेलवे ने “हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज” (Hydrogen for Heritage) पहल की शुरुआत की है। इस योजना के तहत देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू करने की दिशा में तेज़ी से काम किया जा रहा है।
भारतीय रेलवे ने शुक्रवार 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेन की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से हाइड्रोजन से चलने वाली इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई इसके साथ ही भारत उन देशों की सूची में शामिल हो गया, जहां हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है.
पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा, “जींद से सोनीपत तक चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे पावरपुल हाइड्रोजन ट्रेन है. ये 3200 हार्स पावर की ट्रेन है. ये सबसे ताकतवर ही नहीं, भारत की हाइड्रोजन ट्रेन सबसे लंबी भी है.” “दुनिया में बाकी जगह तीन या चार कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन चल रही हैं. भारत ने सीधे 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन चलाई है.”
1. हाइड्रोजन ट्रेन क्या है?
हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल या पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों से अलग होती है। यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल (Hydrogen Fuel Cell) का उपयोग करती है।
काम करने का तरीका: फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का रासायनिक मिश्रण होता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है और ट्रेन की मोटर चलती है।
शून्य उत्सर्जन (Zero Emission): इस प्रक्रिया में धुएं या जहरीली गैसों के बजाय केवल पानी की भाप (Water Vapour) और गर्मी (Heat) निकलती है। इसलिए इसे पूर्णतः ‘इको-फ्रेंडली’ ट्रेन माना जाता है।
2. भारतीय रेलवे की योजना और रूट
भारतीय रेलवे ने अपने हेरिटेज और सुंदर पहाड़ी मार्गों पर सबसे पहले हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना बनाई है:
ट्रायल रूट: भारत में पहला हाइड्रोजन ट्रेन ट्रायल जींद-सोनीपत सेक्शन (हरियाणा) पर निर्धारित किया गया है।
हेरिटेज रूट्स: इसके बाद इसे विभिन्न ऐतिहासिक और सुंदर रेल मार्गों पर चलाया जाएगा:
कालका-शिमला रेलवे
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे
नीलगिरि माउंटेन रेलवे
कांगड़ा घाटी रेलवे
माथेरान हिल रेलवे
3. हाइड्रोजन ट्रेन के प्रमुख लाभ
पर्यावरण संरक्षण : कार्बन डाइऑफ़्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का कोई उत्सर्जन नहीं।
कम शोर : डीजल इंजन की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन काफी शांत (Noise-free) होती है।
डीजल पर निर्भरता : कम आयातित ईंधन और डीजल पर निर्भरता कम होने से देश की अर्थव्यवस्था को लाभ।
नेट-ज़ीरो : लक्ष्यभारतीय रेलवे के 2030 तक ‘नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जक’ बनने के लक्ष्य में सहायक।
हाइड्रोजन ट्रेन भारत में हरित और टिकाऊ परिवहन का भविष्य है। यह न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करेगी जो हरित ऊर्जा से रेल चला रहे हैं।