जावरा सिविल अस्पताल की नई उपलब्धि: लाखों की रीकैनलाइजेशन सर्जरी अब मुफ्त, निःसंतान दंपतियों को मिलेगी नई उम्मीद

विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय के प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

जावरा (अभय सुराणा)। जावरा विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। अब सिविल अस्पताल जावरा में रीकैनलाइजेशन (नसबंदी के बाद ट्यूब को पुनः जोड़ने) की सुविधा शुरू हो गई है। इस नई सुविधा से ऐसे दंपतियों को नई उम्मीद मिलेगी, जिन्होंने परिवार नियोजन के तहत नसबंदी करवा ली थी, लेकिन बाद में किसी कारणवश संतान की आवश्यकता महसूस हुई।
मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र कुमार दवे ने बताया कि जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय के सतत प्रयासों से सिविल अस्पताल में लगातार आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। हाल ही में अस्पताल में कूल्हा प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी की शुरुआत के बाद अब रीकैनलाइजेशन ऑपरेशन की सुविधा भी प्रारंभ कर दी गई है, जिससे क्षेत्र के लोगों को महानगरों और निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. किरण वाडिवा के मार्गदर्शन में सिविल अस्पताल जावरा के प्रभारी डॉ. दीपक पालड़िया ने बुधवार को रीकैनलाइजेशन का सफल ऑपरेशन किया। ग्राम दूधिया निवासी पेपा बाई प्रजापति (30 वर्ष), जिनकी दो पुत्रियां और एक पुत्र था, लेकिन आठ माह की उम्र में पुत्र का निधन हो गया था। पुत्र के जन्म के बाद उन्होंने नसबंदी ऑपरेशन करा लिया था। संतान खोने के बाद पुनः मातृत्व का अवसर दिलाने के उद्देश्य से उनका रीकैनलाइजेशन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
डॉ. दीपक पालड़िया ने बताया कि अब तक सिविल अस्पताल जावरा में 17 महिलाओं के सफल रीकैनलाइजेशन ऑपरेशन किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में इस प्रकार की सर्जरी पर सामान्यतः एक लाख से ढाई लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि जावरा सिविल अस्पताल में यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को बड़ा लाभ मिलेगा।
रीकैनलाइजेशन ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. अतुल मंडवारिया, डॉ. दिनेश पाटीदार, नर्सिंग ऑफिसर शिरोमणि मसीह, सहायक अनिल बैरागी एवं रितुराज सिंह का विशेष योगदान रहा।
क्षेत्रवासियों ने इस नई स्वास्थ्य सुविधा की शुरुआत का स्वागत करते हुए इसे जावरा के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से न केवल लोगों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि निःसंतान दंपतियों को भी नई उम्मीद और बेहतर उपचार अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकेगा।

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