

रतलाम26 जुलाई । आराधना भवन श्रीसंघ रतलाम में इस वर्ष चातुर्मास हेतु आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय मुक्ति प्रभसुरीश्वर जी म. सा. की आज्ञा से युवा हृदय परिवर्तक परम पूज्य गणिवर्य कल्याणरत्न विजय जी म. सा. के शिष्य रत्न नूतन गणिवर्य परम पूज्य नि:श्रेयस विजय जी म. सा. आदि ठाणा पांच का आज भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
श्रीसंघ में सुबह से ही बहुत ही उत्साह एवं प्रातः से ही श्रावक श्राविकाएं सैकड़ों की संख्या में धानमंडी में सामैय्या के लाभार्थी परिवार शांतिलाल जी हस्तीमल जी धामनोद वाला परिवार के निवास पर इकट्ठा होना शुरू हो गए। जहां श्रीसंघ ने गुरु भगवंत की अगवानी की।इसके बाद मंगल प्रवेश सामैया प्रारंभ हुआ। सबसे आगे अश्व पर युवक धर्म पताका लिए चल रहे थे।उसके पीछे आराधना भवन महिला मंडल की श्राविकाएं मंगल कलश लिए चल रही थी। परम पूज्य गच्छाधिपति श्रीमद् विजय रामचंद्र सुरीश्वर जी की तस्वीर सुसज्जित बग्गी में थी। पीछे सुमधुर संगीत बैंड धार्मिक धुन बिखेर रहा था। पूरे रास्ते जगह-जगह भक्तजनों द्वारा गहुली की गई एवं गुरु भगवंत से आशीर्वाद प्राप्त किया।
“गुरु जी हमारे आए हैं, नई रोशनी लाए हैं ” के नारे गूंजायमान रहे। सामैया धानमंडी, गणेश देवरी, बजाज खाना, चांदनी चौक, चौमुखीपुल, घास बाजार, पोरवालों के वास होता हुआ आराधना भवन उपाश्रय पहुंचा, जहां पूज्य गुरुदेव नि:श्रेयस विजय जी महाराज साहब ने शुभ मुहूर्त में धार्मिक विधि से प्रवेश किया एवं इसके बाद हनुमान रुंडी पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हो गया। महती धर्म सभा को संबोधित करते हुए गणिवर्य नि:श्रेयस विजय जी महाराज साहब ने फरमाया कि विषय एवं कषाय जीवन में नहीं आवे ऐसा तप इस चातुर्मास में करना है। धर्म से जो मिला है उसका भुगतान करने में कुछ गलती नहीं है, लेकिन धर्म का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। यदि हमेशा ज्ञानी को ही झुकता है आत्मा में कोमलता, करुणा होना चाहिए। व्यक्ति को हमेशा तीन चीजों का ध्यान रखना चाहिए, पहले मन को हमेशा शांत रखें, दूसरा मन को हमेशा सकारात्मक रखें एवं तीसरा मन को हमेशा पवित्र रखें। आत्मा को संस्कारी बनाकर शाश्वत सुख की प्राप्ति की जा सकती है।
इस अवसर पर प्रथम गुरु पूजन का लाभ हरीश कुमार बाबूलाल गोटा वाला परिवार द्वारा लिया गया एवं परिवार द्वारा आत्म उत्कर्ष चातुर्मास प्रवेश निमित्त महावीर स्वामी जिनालय सेठ जी के बाजार में प्रभु की भव्य अंग रचना एवं मंदिर की भव्य पुष्प सजा एवं दीपक सजा की गई। इस अवसर पर श्रीसंघ में 121 आयंबिल तप की आराधना की गई जिसका संपूर्ण लाभ हस्तीमल शांतिलाल धामनोद वाला परिवार द्वारा लिया गया। आयोजन को सफल बनाने में आराधना भवन ट्रस्ट बोर्ड, आराधना भवन सेवा समिति, चंद्रवीर परिवार एवं सभी महिला मंडल का सहयोग सराहनीय रहा।