
रतलाम, 26 जुलाई। धर्म प्रभावना, संयम साधना और आध्यात्मिक जागृति के अद्वितीय प्रेरणास्रोत, त्रिस्तुतिक जैन परंपरा के प्रख्यात संत, आचार्यदेव श्री हेमेंद्र सुरीश्वर जी म.सा. के अंतेवासी शिष्यरत्न एवं आचार्यदेव श्री ऋषभचंद्र सुरीश्वर जी म.सा. के समुदायवर्ती, रतलाम नगर के गौरव, परम पूज्य मुनिराज श्री चन्द्रयश विजय जी म.सा. तथा मुनिराज श्री जिनभद्र विजय जी म.सा. आदि ठाणा का वर्ष 2026 का पावन चातुर्मास गुरुदेव श्री राजेन्द्र सुरिश्वर जी म.सा. की पावन समाधि स्थली श्री मोहनखेड़ा तीर्थ पर संपन्न होगा।
इसी क्रम में सोमवार, 27 जुलाई 2026 को प्रातः 8:30 बजे मोहनखेड़ा तीर्थ की पुण्यधरा पर मुनिश्री का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश देशभर से पधार रहे हजारों श्रद्धालुओं, संतभक्तों एवं जैन श्रीसंघों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न होगा। यह अवसर केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, तप और गुरु भक्ति का विराट महापर्व बनने जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मालवा अंचल के रतलाम, जावरा, खाचरोद, नागदा, आलोट, महिदपुर, थांदला, बढ़नगर, इंदौर, उज्जैन, टांडा, बाग एवं कुक्षी सहित मुंबई, हैदराबाद तथा राजस्थान के मारवाड़, भीनमाल, आहोर, गुड़ा, बालोतरा, सायला, नाकोड़ा सहित अनेक नगरों से बड़ी संख्या में श्रीसंघ, श्रावक-श्राविकाएं एवं गुरु भक्त मोहनखेड़ा तीर्थ पहुंच रहे हैं। तीर्थ परिसर में भक्तों के आगमन का सिलसिला निरंतर जारी है।
मुनिराज श्री चन्द्रयश विजय जी म.सा. अपने ओजस्वी प्रवचनों, सिद्धितप की प्रेरणा, शास्त्रज्ञान, संयममय जीवन एवं प्रभावशाली धर्मप्रभावना के कारण देशभर के जैन समाज में विशेष श्रद्धा और सम्मान के पात्र हैं। उनके सान्निध्य में आयोजित होने वाला चातुर्मास श्रद्धालुओं के लिए आत्मचिंतन, स्वाध्याय, तप, आराधना और संस्कार संवर्धन का अनुपम अवसर रहेगा।
मोहनखेड़ा तीर्थ पर आयोजित इस ऐतिहासिक मंगल प्रवेश को लेकर समाज में अभूतपूर्व उत्साह का वातावरण है। आयोजन को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। तीर्थ परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया है तथा देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
हेमंत मूणत ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर परम पूज्य मुनिश्री के मंगल प्रवेश के साक्षी बनें, गुरु वंदना का लाभ लें तथा इस पावन चातुर्मास के माध्यम से धर्म आराधना, संयम और आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त करें।