सर्वभाषा काव्य महोत्सव में भाषाओं की मिठास ने दिया एकता का संदेश


रतलाम। नगर की अग्रणी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था महक कला, साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच द्वारा अपने 25वें स्थापना वर्ष के अवसर पर गुलाब चक्कर में विशाल सर्वभाषा काव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। समारोह में हिंदी, संस्कृत, मालवी, मराठी, उर्दू, पंजाबी एवं सिंधी सहित विभिन्न भाषाओं के कवियों और रचनाकारों ने अपनी रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर साहित्यिक समृद्धि और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रदीप सिंह राव ने कहा कि भाषाओं की मिठास लोगों को दिलों से जोड़ने का कार्य करती है। धर्म और संप्रदाय के नाम पर व्याप्त कट्टरता समाज में अलगाव और दूरियां पैदा करती है, जबकि विभिन्न भाषाएं अपनी मिठास और उपयोगिता के माध्यम से लोगों को जोड़ती हैं। प्रत्येक भाषा और उसका साहित्य समाज तथा देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है। कवि और साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से भाषाओं और साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए धमचक मुलथानी ने कहा कि रतलाम का इतिहास कवियों और कविता प्रेमियों का रहा है। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, लेकिन अन्य भारतीय भाषाएं उसकी प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि उसकी सहयात्री हैं। महक संस्था द्वारा सर्वभाषा काव्य सम्मेलन का आयोजन अत्यंत प्रशंसनीय और अनुकरणीय पहल है।
विशिष्ट अतिथि गीतकार श्री हरिशंकर भटनागर ने कहा कि समाज में वैचारिक समानता और समरसता बनी रहे, इसके लिए साहित्यकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। संस्था अध्यक्ष मोड़ी राम सोलंकी ‘एकांत’ ने कहा कि संस्था के 25वें स्थापना वर्ष का यह सर्वभाषा काव्य महोत्सव ऐतिहासिक बन गया है। कारगिल विजय दिवस और सर्वभाषा सम्मेलन हमारी सर्वभाषी काव्यात्मक यात्रा के सफलतम सोपान हैं।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन शिक्षक संघ अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् श्री दिनेश शर्मा ने किया। उनके कुशल संचालन ने समारोह को गरिमा और ऊंचाई प्रदान की।
सर्वभाषा काव्य समारोह में रतलाम सहित आसपास के क्षेत्रों से आए रचनाकारों और नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। हिंदी भाषा में हरिशंकर भटनागर, सुनील निरंजन, शिव चौहान ‘शिव’, रामचंद्र ‘फुहार’, श्रीमती स्नेहलता धाकड़, आशा रानी उपाध्याय, कीर्ति पंकज पवार, यू.एल. जायसवाल, छत्रपाल सिंह, सुरेश पाठक, शांतिलाल ‘शांतनु’, चंद्रशेखर केलवा, दिनेश जैन, दिलीप जोशी एवं वीरेंद्र रावल सहित अनेक रचनाकारों ने काव्य पाठ किया।
संस्कृत भाषा में ओमप्रकाश ओझा, शकुंतला व्यास एवं सतीश शिकारी, मालवी भाषा में चारु क्षोत्रिय, मनोहर सिंह चौहान, रमेश मनोहर (जावरा), डॉ. मोहन परमार, संजय परसाई ‘सरल’, श्यामसुंदर भाटी, चंद्रशेखर केलवा, आई.एल. पुरोहित एवं कैलाश वशिष्ठ, मराठी में श्रीराम दिले एवं सुहास चितले, उर्दू में अब्दुल सलाम खोकर, निसार पठान, शरीफ खोकर एवं कमल, पंजाबी में कवलजीत सिंह मक्कड़ एवं विवेक शर्मा तथा सिंधी भाषा में आर. सतवानी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर संस्था के नवीन पदाधिकारियों का मनोनयन भी किया गया। सुनील निरंजन को सचिव, विनोद झालानी को कोषाध्यक्ष, कैलाश वशिष्ठ को मीडिया प्रभारी, वीरेंद्र रावल को व्यवस्था प्रभारी तथा सतीश शिकारी को सह-व्यवस्था प्रभारी मनोनीत किया गया।
संस्था के 25 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष अधिकारी-कर्मचारी संघ द्वारा संस्था अध्यक्ष मोड़ी राम सोलंकी ‘एकांत’ का सम्मान भी किया गया।