- भारत संतो की, तीर्थंकरो की भूमि है : साध्वी महती श्री म सा

रतलाम 29 जुलाई। बिना गुरु के जो बीते वह उम्र होती है और गुरु के साथ बीते वो जीवन होता है, जिसको गुरु मिले उसका जीवन खिले, आज के इंसान को खाना नही आया तो फैमली डॉक्टर बना लिया, बोलना नहीं आया तो फॅमिली वकील बना लिया, लेकिन जीना नही आया तो फैमिली गुरु नहीं बनाया, फैमिली डॉक्टर की सलाह के बिना हम बड़े से बड़े डॉक्टर के पास नहीं जाते, लेकिन अगर हम सुन ले की फलाँ फलाँ चमत्कारिक गुरु आया है तो हम अपने फैमिली गुरु से पूछे बिना उस चमत्कार की शरण में चले जाते है। उक्त विचार नीमचौक जैन स्थानक पर विराजित महासती प्रफुल्ला श्री म सा ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित धर्मसभा मे व्यक्त किए।
आपने फ़रमाया की गुरु के प्रति श्रद्धा हो तो राजा रणजीत सिंह जैसी, गुरु नानक ने कहा था की मेरे मरने के बाद मेरी समाधी मत बनाना जो समाधी बनाएगा उसका कुल नष्ट हो जायेगा, फिर भी राजा रणजीत सिंह के एक मात्र पुत्र होते हुए भी उन्होंने गुरु की समाधी बनवाई और उनका पुत्र चल बसा, उन्होंने कहा की मेरा कुल नष्ट हो तो कोई बात नहीं मेरे गुरु का नाम नहीं मिटना चाहिए। काम क्रोध के बादल जब घुमड़ते है तो कषाय की आग बरसती है उस कषाय की आग को ठंडा करने के लिए गुरु का होना बहुत जरुरी है।
गुरु 4 प्रकार के होते है पहला स्मरण गुरु : जो दूर से स्मरण मात्र करके अपने शिष्य को संकट के बचा लेते है, दूसरा दृष्टि गुरु : ऐसे गुरु की कृपा दृष्टि शिष्य पर पड़ जाये तो शिष्य निहाल हो जाता है, तीसरा है शब्द गुरु : ऐसे गुरु के शब्द रूपी आशीर्वाद से व्यक्ति का जीवन संवर जाता है, चौथे होते है स्पर्श गुरु : ऐसे गुरु हाथ सर पर रख दे तो निहाल कर दे।
धर्मसभा को पूज्या महती जी मसा ने सम्बोधित करते कहा की भारत संतो की तीर्थंकरो की भूमि है, यह पर्वों की भूमि है, प्रतिदिन यहाँ कोई न कोई पर्व होता है, तराजू के दो पलड़ो के बीच बेलेंसिंग डंडी का पावर होता है वैसे ही हमारे जीवन के दो पलड़े देव और धर्म है, उसके बीच बैलेसिंग पावर के रूप में गुरु होते है और धर्म का रास्ता दिखाते है। क्रिकेट मैच में एम्पायर न हो, हॉस्पिटल में डॉक्टर न हो, अदालत में जज न हो और जीवन में गुरु न हो तो उद्धार संभव नहीं है, जैसे बिना वाईफाई के नेटवर्क का सिग्नल कनेक्ट नही होता है, वैसे ही गुरु रूपी वाईफाई के बिना हम परमात्मा से कनेक्ट नहीं हो सकते है।