
रतलाम 30 जुलाई। इस दुनिया में किसी को कुछ मिलता है, किसी को कुछ कुछ, किसी को बहुत कुछ लेकिन सब कुछ किसी को नही मिलता है। सोने में बहुत कुछ है, ऐश्वर्य है, खूबसूरती है, वैभव है लेकिन स्वर्ण में खुशबु नही है, सागर में अथाह जलराशि है, बेशकीमती रत्न है, वनस्पति है, लेकिन फिर भी समुद्र में कमी है की उसका पानी मीठा नहीं है, हिमालय के पास ऊँचाई है, बेशकीमती जड़ी बुटियाँ है, संजीवनी बूटी है, खूबसूरती है, लेकिन उसकी कमी यह है की हिमालय पर चढ़ने के लिए सीढ़िया नहीं है, अनंत आकाश में चाँद तारे, सूर्य, गृह सब कुछ है लेकिन आकाश में फूल नहीं खिल सकते है, चक्रवर्ती राजा की पटरानी जिसको श्रीदेवी कहते है, उसके पास भी बहुत कुछ है, राजा रानियाँ उसकी बात मानते है, धन वैभव, एश्वर्य, सुन्दरता है लेकिन उसकी एक कमी है की वो कभी माँ नहीं बन सकती है उक्त विचार नीमचौक जैन स्थानक पर आयोजित धर्मसभा मे महासती प्रफुल्ला श्री म सा ने व्यक्त किए।
आपने कहा की सब कुछ किसी के पास नहीं है, सब कुछ पाने की चाहत में अपना जीवन ख़त्म मत करो, क्योंकि किसी को भी भाग्य से ज्यादा और समय से पहले नहीं मिलता है, आपका जन्म अच्छे कुल में हुआ है, रहने के लिए मकान है, पाँचो इन्द्रिया सही सलामत है, इसलिए जो मिला है वो बहुत कुछ है सब कुछ की तलाश में मत भटको। विज्ञान कहता है सुख आएगा, मानव कहता है सुख तो पहले था, लेकिन धर्म कहता है सुख आज में है, किसी को धर्म करने की प्रेरणा दो तो कुछ लोग कहते है की अभी तो मरने की भी फुर्सत नहीं है, अगर उसी व्यक्ति का एक्सीडेंट हो जाये हाथ पैर की हड्डिया टूट जाये और डॉक्टर छः महीने का बेड रेस्ट बोल दे, तब क्या करोगे, तब भगवान को याद करोगे , इसीलिए कहते है की दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई, समय के साथ चलना है तो धर्म आराधना करो, नहीं तो प्रकृति चोटी पकड़ कर धर्म करवा लेगी, समय रहते धर्म कर लिया तो अंतिम समय संथारेसहित शांति पूर्वक निकलेगा नहीं तो अंतिम समय में हॉस्पिटल में यहाँ नली, वहाँ नली, हाय हाय करते करते बड़ी मुश्किल से प्राण निकलने वाले है।
श्रीसंघ मीडिया प्रभारी नीलेश बाफना ने बताया की चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रात: 06 से 07 प्रार्थना, 09 से 10 प्रवचन, 10.30 से 11 जिन विजन दोपहर 03 से 04 ज्ञान शिविर (तत्व टॉक) एवं बच्चो को लिए गुरु गणेश आराधना माल, छोटे बच्चों के लिए शिशु दर्शन योजना आदि कई धार्मिक आयोजन नियमित रखे गए है। महासतिया जी का आव्हान है की अधिक से अधिक संख्या में सामायिक, प्रतिक्रमण, धार्मिक पाठ्यक्रम सीखने का प्रयास करे।