“दया से बड़ा कोई दान नहीं और करुणा से बड़ा कोई धर्म नहीं” का दिया संदेश


जावरा (अभय सुराणा)। लायन्स इंडिया जावरा द्वारा नवीन सत्र के अंतर्गत जन्मोत्सव को सेवा और जीव दया से जोड़ते हुए प्रेरणादायी गौ-सेवा अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गौ-सेवा, जीव दया एवं मानवता का अनुपम संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में लायन्स सदस्यों एवं मातृशक्ति ने सहभागिता करते हुए गौमाता को गौ-ग्रास एवं गुड़ अर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
लायन्स इंडिया अध्यक्ष प्रदीप सेठिया ने कहा कि “धर्म में जीव दया को परम धर्म माना गया है। प्रत्येक जीव में आत्मा का वास है, इसलिए किसी भी प्राणी को कष्ट पहुँचाना पाप तथा उसकी रक्षा करना सच्चा धर्म है। जो व्यक्ति निष्काम भाव से जीवों की सेवा करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और संतोष का वास होता है। दया से बड़ा कोई दान नहीं और करुणा से बड़ा कोई धर्म नहीं।”
जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में गौ-सेवा का लाभ शैलेष कांठेड़, अंशु श्रीमाल, अरुणा चपड़ोद, अलका मेहता एवं रंजना जैन द्वारा लिया गया। इस अवसर पर लायन्स इंडिया परिवार ने सभी लाभार्थियों का माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
लायन्स सचिव संदीप श्रीमाल ने कहा कि “जीव दया को अपने जीवन का संस्कार बनाएं। सेवा और करुणा के ऐसे कार्य समाज में संवेदनशीलता, प्रेम एवं मानवता का विस्तार करते हैं।” उन्होंने सभी सदस्यों से नियमित रूप से सेवा गतिविधियों में सहभागी बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान सदस्यों ने सेवा कार्यों के विस्तार हेतु सहयोग राशि प्रदान करने की घोषणा की, जिसका उपस्थितजनों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। जन्मदिन समिति संयोजक देवेन्द्र धम्माणी ने सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में रवि करनावट, प्रदीप सेठिया, सुनील मेहता, ज्ञानचंद ओस्तवाल, सुनील खेमसरा, प्रदीप लुहाड़िया, देवेन्द्र धम्माणी, अभिनंदन सुराणा, राकेश जैन, विनोद ओस्तवाल, शेखर नाहर, शैलेष कांठेड़, संदीप श्रीमाल, नवीन चपड़ोद, भूपेन्द्र भंडारी, मनीष मनसुखानी, नीलम करनावट, नैना सेठिया, अलका मेहता, बबीता लुहाड़िया, प्रीति धम्माणी, अरुणा चपड़ोद, रंजना जैन, प्रतिभा कांठेड़, बरखा मनसुखानी, रूपा ओस्तवाल सहित अनेक सदस्य एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जन्मदिन केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और जीव दया के माध्यम से समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करने का भी श्रेष्ठ माध्यम है।