नेत्रम संस्था के प्रयास रंग लाए, मृत्यु के बाद भी अमर हुई मानवता

रतलाम। नेत्रम संस्था के सतत जनजागरण एवं सेवा प्रयासों के परिणामस्वरूप मंगलवार को मात्र एक घंटे के अंतराल में दो नेत्रदान संपन्न हुए। इन दोनों नेत्रदानों से चार नेत्रहीनों के जीवन में नई रोशनी की उम्मीद जगी है। परिजनों के इस संवेदनशील निर्णय ने समाज के सामने मानवता, सेवा और अंगदान के प्रति प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
पहला नेत्रदान धानमंडी निवासी स्व. नागिनलाल सुराना (शिवगढ़ वाले) के निधन के पश्चात संपन्न हुआ। विपुल चोपड़ा एवं ओमप्रकाश अग्रवाल की प्रेरणा से पुत्र अमित सुराना तथा पौत्र आदिश सुराना ने नेत्रदान के लिए सहमति प्रदान की।
दूसरा नेत्रदान तेजा नगर निवासी स्व. श्रीमती शांता देवी भटेवरा, धर्मपत्नी स्व. इंदरमल भटेवरा, के निधन के पश्चात संपन्न हुआ। सुनील मूणत एवं योगेश लसोड़ की प्रेरणा से अशोक भटेवरा, दिलीप भटेवरा, राजेंद्र भटेवरा, हितेश भटेवरा, पीयूष भटेवरा एवं विपुल भटेवरा ने नेत्रदान की स्वीकृति दी।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने बताया कि दोनों परिवारों की सहमति मिलते ही डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज, रतलाम की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचना दी गई। उनके निर्देशन में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में डॉ. विष्णु जांगिड़, नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाहा एवं जीवन देवड़ा ने नेत्रदान की संपूर्ण प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कराई।
इस सेवा कार्य में नेत्रम संस्था के सदस्य यशवंत पावेचा ने अपने निजी वाहन से मेडिकल टीम को दोनों दिवंगतों के निवास तक पहुंचाने एवं वापस मेडिकल कॉलेज लाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
नेत्रदान के दौरान हेमंत मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, नवनीत मेहता, शलभ अग्रवाल, भगवान ढालवानी, सुशील ‘मीनू’ माथुर, गोपाल राठौड़ (पतरा वाले), गिरधारीलाल वर्धानी, पंडित चंद्रप्रकाश शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर नेत्रम संस्था एवं डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज के शासकीय नेत्र बैंक द्वारा दोनों परोपकारी परिवारों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
नेत्रम संस्था ने नागरिकों से अपील की है कि मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला लाने के इस महादान से जुड़ें।