

इंदौर/दिल्ली (राजेश जैन दद्दू) । श्रंमण संस्कृति के महाश्रमण आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज संसघ के सान्निध्य में हुआ लोकार्पण। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह ग्रंथ श्रमण संस्कृति सेवा ट्रस्ट का प्रकाशन, एवं स्वाध्याय प्रेमियों को निःशुल्क उपलब्ध परम पूज्य महाश्रमण आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं परम पूज्य श्रमण सुव्रत सागर जी महाराज द्वारा संपादित “भक्तामर और भारतीय चित्रांकन” नामक अनुपम ग्रंथ का भव्य एवं गरिमामय विमोचन कार्यक्रम ऋषभ विहार, दिल्ली में संपन्न हुआ। इस ग्रंथ का लेखन श्री एन.पी. उपाध्याय जी द्वारा किया गया है। ग्रंथ प्रकाशन के पुण्यार्जक परम गुरु भक्त टी.के. मंजु वेद इंदौर* एवं श्री महेन्द्र जी लुहाडिया हैं। ग्रंथ का प्रथम संस्करण का प्रकाशन श्रमण संस्कृति सेवा ट्रस्ट द्वारा किया गया है।
विमोचन कार्यक्रम में गरिमा मय उपस्थिती पवन गोधा, दिल्ली शरद कासलीवाल, एवं महासभा पदाधिकारी शरद जैन, महालक्ष्मी चैनल, देवेंद्र सिंघई, वास्तुविद केदार जैन, ग्वालियर* सहित अनेक गणमान्य श्रद्धालु आचार्य श्री जी के सान्निध्य में उपस्थित थे
इस पावन अवसर परम पूज्य महाश्रमण आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का संपूर्ण प्रवचन ग्रंथ की विषय-वस्तु पर ही केंद्रित रहा। गुरुदेव ने भक्तामर स्तोत्र के महत्व एवं भारतीय चित्रांकन कला के माध्यम से जैन संस्कृति की सूक्ष्मता को अत्यंत गहराई से समझाया। वर्षायोग समिति ने कहा कि निःशुल्क उपलब्ध
हैं सभी स्वाध्याय प्रेमियों के लिए यह ग्रंथ निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। सनातन संस्कृति के विद्वान द्वारा रचित यह ग्रंथ भक्तामर स्तोत्र एवं भारतीय कला के शोधकर्ताओं के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने ग्रंथ के विमोचन को जैन साहित्य एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।