जो स्वयं को ज्ञानी और गुरु को अज्ञानी माने उसका कभी कल्याण नहीं हो सकता – राष्ट्र संत सुधा सागर जी महाराज

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । श्रमण संस्कृति के महाश्रमण राष्ट्र संत सुधा सागर जी महाराज ने बुधवार को सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विद्या सुधा सत्संग मंडप में श्रद्धालुओं को एहसास कराया कि आज हर व्यक्ति कोई माने या ना माने स्वयं को श्रेष्ठ, ज्ञानी एवं महान घोषित करना चाहता है यही उसकी भूल है। उदाहरण देते हुए मुनिश्री ने समझाया कि हीरा मुख से ना कहे लाख हमारा मूल्य यदि हीरा कहे कि मैं असली हूं, कस्तूरी कहे कि मैं सुगंधी हूं तो समझ लेना वह नकली है। यही स्थिति उन सब की है जो स्वयं को ज्ञानी और गुरु को अज्ञानी मानते हैं और ऐसे लोग कभी महान नहीं बन सकते और ना ही उनका कल्याण हो सकता है धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरुदेव ने अपनी मंगल देशना में यह भी कहा ज्ञान चाहिए तो ज्ञानी के समझ मुर्ख बनाकर जाओ।
देव शास्त्र गुरु के लिए जो कुछ भी तुमने किया है उन्हें अवगत मत कराना उन्हें पता नहीं चलना चाहिए की यह तुमने किया है यह वरदान के समान है जो तुम्हें फलित होगा। ज्ञानी पुरुषों के सामने, सत्संग पंडाल में, और मंदिर में जाओ तो कोरी स्लैट बनकर जाना सब कुछ पा जाओगे। लिखी स्लेट बनकर जाओगे तो स्लेट पर लिखा हुआ भी समझ में नहीं आएगा और जो लिखोगे वह भी समझ नहीं आएगा।
इन तीन लोगों का कभी कल्याण नहीं हो सकता जो गुरु के सामने ज्ञानी, शास्त्र स्वाध्याय के समक्ष अपने को विद्वान मानते हैं। जो ना गुरु को मानते हैं और ना गुरु की मानते हैं। यह तीनों दुर्गुण है जो रावण के पास थे और रावण की तरह इनकी भी दुर्गति होगी। सच्चे गुरु के मुख से जो भी शब्द उच्चरित हो वह मंत्र समान होता है।
धर्म सभा में सामाजिक संसद युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राहुल सेठी, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा गोधा, समाजसेवी रानी अशोक डोसी, आकाश कोल हर्ष जैन, दिगंबर जैन समाज छत्रपति नगर के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, ट्रस्टी कमल जैन, विपुल बाझलं मयंक जैन, प्रिंसिपल टोंग्या, मुक्ता जैन, सोनाली बगड़िया आदि श्रेष्ठी उपस्थित थे संचालन आवाज के जादूगर अनुराग जैन ने किया।

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