अपने दोष देखने वाला धर्मी है, दूसरों के दोष देखने वाला नहीं – श्रमण संघीय प्रर्वतक श्री प्रकाशमुनिजी मसा

रतलाम, 21 अगस्त। रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कहा है कि आत्मा जिस समय अपने आप में लीन रहती है, तब वह धर्मी है। अपने दोष देखने वाला ही धर्मी होता है, दूसरों के दोष देखने वाला धर्मी नहीं होता।
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य प्रवर्तकश्री ने कहा कि साधना में प्रवेश करने की पहली शर्त यही है कि अपने दोष देखो। यदि किसी दोष नहीं देखना और मिथ्यात्म में रहना अच्छा लगता है, तो समझो कि वह पाप कर रहा है। मिथ्यात्म में सभी पापों का समावेश हो जाता हैं। पाप में मन रमण करता है, तो सबकों उसका प्रायश्चित करना चाहिए। संसार में आनंद नहीं है, अपितु आनंद तो आत्मा में होता है। मनुष्य पाप करके जो आनंद भोगता है, उसकी सजा नर्क में भोगनी पडती है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि दिखावा नहीं करना और जैसा है, वैसा दिखाना सम्यक दृष्टि है। दिखावा में माया छुपी रहती है, जो कषाय का कारण बनती है। धर्मी और धर्मात्मा में भी अंतर होता है, जो धर्म में जीता है, वह धर्मी और जो धर्म की क्रिया करता है, वह धर्मात्मा होता है। ज्ञान और दर्शन होते है, तभी हम जीव है। जीव कभी अजीव नहीं होता। सम्यक दृष्टि का उपयोग कर सभी धर्म करेंगे, तो आत्मा से परमात्मा बनते देर नहीं लगेगी।
प्रवचन को आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। उनके साथ ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा, एवं श्री दर्शनमुनिजी मसा मंचासीन रहे। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन आयुष गंग ने किया। उन्होंने बताया कि 23 अगस्त को सुबह 8 बजे श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में कपल संस्कार शिविर का आयोजन किया जाएगा। दोपहर 2 बजे बाल संस्कार शिविर रखा गया है।

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