केरल प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी बैंकों का 3 दिन का सप्ताह किया जाए

बैंक कर्मियों की समस्याओं एवं मांगो को लेकर मुख्यमंत्री श्री चौहान को दिया ज्ञापन

भोपाल। बैंक कर्मियों की मांगे, सुझाव एवं चिंता को लेकर यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स, मध्यप्रदेश इकाई द्वारा मुख्यमंत्री श्री चौहान को ज्ञापन दिया गया । ज्ञापन के माध्यम मांग की है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में संक्रमण का प्रसार बहुत तेज है। मध्य प्रदेश के हजारों बैंक कर्मी इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। शायद ही कोई बैंक ऐंसी हो जहां बैंक कर्मी कोरोना से संक्रमित ना हो। प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में अभी तक 4000 के करीब बैंक कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से करीब 70 का निधन हो चुका है, जिसमें सफाई कर्मचारी से लेकर बैंक के उप महाप्रबंधक भी शामिल हैं। बैंकें कोरोनावायरस के संक्रमण की हॉट स्पॉट बनती जा रही हैं । बैंक में लगातार आ रहे बैंक ग्राहकों से बैंक कर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। तत्पश्चात एक संक्रमित बैंक कर्मी जब तक उसे संक्रमण के बारे में मालूम पड़ता है तब तक वह कई बैंक के ग्राहकों, अपने परिवार एवं नजदीकियों को संक्रमित कर चुका होता है । प्रदेश की कई बैंकों की कई शाखाओं में एक अच्छी संख्या में बैंक कर्मी संक्रमित पाए गए हैं। बैंकों के प्रशासनिक कार्यालय भी इस संक्रमण से अछूते नहीं है। इतने संक्रमण के बावजूद भी ना तो उन बैंक के प्रशासनिक कार्यालयों/ शाखाओं को कुछ दिन के लिए बंद कराया जा रहा है एवं नाही उनको सही तरह से सैनिटाइज कराया जा रहा है। यही कारण है की बैंकों के माध्यम से प्रदेश में संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है।इस बारे में प्रशासन द्वारा भी इसे रोकने के लिए कोई भी सार्थक प्रयास नहीं किए जा रहे हैं । फ्रंटलाइन वर्कर्स के रूप में कार्य करते हुए बैंक कर्मी प्रतिदिन हजारों ग्राहकों के संपर्क में आते हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें सैद्धांतिक रूप से कोरोना वारियर्स मान लिया है, इसके बावजूद भी उनके लिए प्राथमिकता के आधार पर सरकार द्वारा अभी तक टीकाकरण की कोई व्यवस्था नहीं की है। यदि अब तक सभी बैंक कर्मियों को टीका लग गया होता उस स्थिति में ना तो इतने बैंक कर्मी संक्रमित होते और ना ही उनका निधन हो पाता।
एक तरफ सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि यदि संक्रमण की चैन को तोडऩा है तो लोग घर से बाहर ना निकलें, वहीं दूसरी ओर बैंकों को सप्ताह में 6 दिन खोल कर रखा जा रहा है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में बैंक के ग्राहक बैंकों में आ जा रहे हैं। यही कारण है कि बैंकों के माध्यम से कोरोना संक्रमण फैल रहा है एवं बैंकें कोरोना संक्रमण की हॉट स्पॉट बनती जा रही हैं। मनुष्य को जिंदा रहने के लिए खाद्य पदार्थ / राशन की आवश्यकता होती है। जब राशन की दुकानों को बंद करा कर ऑनलाइन डिलीवरी उनसे कराई जा सकती है तो क्या कारण है कि बैंकों को सप्ताह में 6 दिनों के लिए खोला जा रहा है? बैंकों में, वर्षों से बैंक के ग्राहक आल्टरनेटिव चैनल के माध्यम से बिना बैंक शाखा में आए बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। क्या इस महामारी के दौरान हम बैंकों को सप्ताह में 6 दिन के स्थान पर केवल 3 दिन के लिए नहीं खोल सकते? उल्लेखनीय है कि हाल ही में केरल सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण की चैन को तोडऩे के लिए अपने आदेश दिनांक 7 मई 2021 के माध्यम से सभी आवश्यक सेवाओं के कार्यालयों को आल्टरनेट दिन में खोलने का निर्णय लिया है। साथ ही साथ यह कार्यालय केवल दोपहर 12:00 बजे तक ही खुले रहेंगे जिसमें बैंक एवं वित्तीय संस्थानों के कार्यालय भी शामिल हैं । केरल सरकार के इस जन हितेषी निर्णय के अनुसार केरल प्रदेश में अब बैंकें सप्ताह में केवल 3 दिन ही खुले रहेंगे।
बैंकों के माध्यम से संक्रमण रोकने के लिए राज्य शासन की ओर से जो पहल एवं प्रयास किए गए हैं, वह नाकामी हैं। उसमें और कुछ करने की गुंजाइश है।
उक्त परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए बैंक कर्मियों की मांगें एवं सुझाव निम्नानुसार हैं-
(1) बैंकों में केरल प्रदेश की तरह 3 दिन का सप्ताह लागू किया जाए।
(2) अन्य प्रदेशों की तरह ,बैंकों का कार्यालयीन समय प्रात: 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक किया जाए।
(3) बैंकों में 33त्न स्टाफ से रोटेशन के आधार पर आवश्यक न्यूनतम बैंकिंग सेवाएं प्रदान कराई जाएं ।
(4) _केंद्र सरकार द्वारा सैद्धांतिक रूप से बैंक कर्मियों को कोरोना वारियर्स मान लिया गया है। अत: सभी बैंक कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण कराया जाए ।
(5) ऐसे क्षेत्र जहां पर बहुत सारी बैंक शाखाएं हैं उस क्षेत्र में कुछ चुनिंदा शाखाओं के माध्यम से बैंक के ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराई जाएं।
(6) स्थानीय प्रशासन द्वारा घोषित संक्रमण क्षेत्र की शाखाओं एवं ऐसे परिसर,जहां पर कोविड सेंटर स्थापित किए गए हैं, की शाखाओं को फिलहाल अस्थाई रूप से बंद किया जाए।
(7) गंभीर बीमारी से ग्रसित, दिव्यांग एवं गर्भवती बैंक कर्मियों को कोरोना काल में कार्य से छूट प्रदान कराई जाए ।
(8) बैंक शाखाओं में बैंक ग्राहकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन की सहायता प्रदान कराई जाए ।
उपरोक्त सुझावों/मांगों को यदि लागू किया जाता है तो यह ना केवल बैंक कर्मियों और बैंक ग्राहकों के लिए सुरक्षा का एक मजबूत कवच होगा बल्कि आवश्यक बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और देश में निरंतर आर्थिक गतिविधियों को मदद करने के साथ-साथ कोरोना संक्रमण की चेन तोडऩे में भी उपयोगी साबित होगा। आपसे अनुरोध है कि बिना और अधिक समय गवाएं उपरोक्त सुझावों/ मांगों पर विधिवत विचार कर इन्हें कार्यान्वित किया जाए । उक्त जानकारी संजीव सबलोक संयोजक यूएफबीयू (म.प्र.) एवं वी.के.शर्मा कोऑर्डिनेटर यूएफबीयू (मप्र) ने दी है ।