रतलाम 30 अगस्त। धर्म के साथ मोह नहीं चलता, श्रद्धा, भक्ति और समर्पण चलते है। गुरूजनों के प्रति मोह भी बंधन है। धर्म कभी बांधने वाला नहीं होता, वह तो कर्मों के मुक्त करता है।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि साक्षात परमात्मा के रहते भी हर आत्मा जागेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। उपदेश सुनने कई आत्माएं आती है, लेकिन परमात्मा की शरण में सब जाएंगी, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। जिस आत्मा को सम्यत्व को उपलब्ध होना होता है, वहीं परमात्मा की शरण प्राप्त करती है। तीर्थंकरों के समवशरण में भी वहीं आत्माएं पहुंचती है, जिनका कल्याण होना होता है।
प्रवर्तकश्री ने सत्य की महिमा बताते हुए कहा कि आजकल छोटी-छोटी बातों में झूठ बोला जाता है। झूठ बोलने के लिए पहले से तैयारी करनी पडती है, जब सत्य बोलने के लिए कोई तैयारी नहीं करनी पडती। तत्काल बोलने वाला तो अक्सर झूठ बोलता है, इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए। कई लोग झूठ बोलने के बाद खुश भी होतें है, लेकिन वे नहीं जानते कि उन्होंने कर्म का बंधन कर लिया है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि आत्मा का स्वभाव झूठ बोलना नहीं होता। बदलाव के लिए विचारों का बदलना जरूरी है। व्यक्ति ध्यान और चिंतन में जाता है, तभी सच बोलता है। विचारों की शुद्धि यदि कर ली, तो आचारों की शुद्धि अपने आप हो जाएगी। विचारो की शुद्धि साधना से ही हो सती है। प्रवचन को आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। उनके साथ ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा, एवं श्री दर्शनमुनिजी मसा मंचासीन रहे। प्रवचन के दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन आयुष गंग द्वारा किया गया।