निमियाघाट, कोडरमा । अहिंसा संस्कार पदयात्रा के प्रणेता साधना महोदधि भारत गौरव उभय मासोपासी आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज निमियाघाट के सहस्त्र वर्ष पुरानी भगवान पारसनाथ की वरदानी छांव तले विश्व हितांकर विघ्न हरण चिंतामणि पारसनाथ जिनेंद्र महाअर्चना महोत्सव पर भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए।
अंतर्मना प्रसन्नसागरजी ने कहा – अक्षय तृतीया का पर्व सुख सौभाग्य का पर्व है मुहूर्त का पर्व है जैन दर्शन कहता है । आदिनाथ स्वामी ने चौदहबे कुलकर के पर्याय में किसानों के बोलने से है कि राजन यह बैल सारी फसल खा जाते हैं क्या करें?
तब उन्होंने भावावेश में बोल दिया जाओ इन बैलों के मुख पर मुसीका बांध दो उन किसानों ने बैलों के मुख पर मुसीका का बांध दी छह घड़ी के लिए जब वह कुलकर की पर्याय से जेनेश्वरी दीक्षा धारण करते हैं तो छह माह तक विधि नहीं मिली और छह माह तक घूमते रहे आहार के लिए। कर्म सिद्धांत कहता है कि जो जैसा कर्म करता है उससे वैसा फल मिलता है।
अंतर्मना प्रसन्नसागरजी महाराज ने कहा— बुरे के लिए तैयार रहो जिंदगी में बुरे दिन कभी भी आ सकते हैं । बेटा कभी भी मुख मोड़ सकता दोस्त कभी भी धोखा दे सकता है । किस्मत कभी भी फूट सकती है -दुनिया कभी भी छूट सकती है । जिंदगी में थोड़ी से ही लोग ऐसे होते हैं जो दुख दर्द की कड़क धूप में साया बनकर मदद करते हैं बाकी तो खुद गर्म होते हैं सुख के सब साथी दुख में ना कोई _तब भी तुम सबका भला करो सब की सेवा करो फिर भी लोग तुम्हारी काट में रहेंगे क्योंकि यह दुनिया बड़ी जालिम है यह हंसने भी नहीं देती ना रोने देती है जीने भी नहीं देती मरने भी नहीं देती जिंदगी के गमों के लिए हमेशा तैयार रहो गम को बुरा मत कहो क्योंकि उसके बाद खुशी खुशी मिलती है वह बड़ी गहरी है इसलिए जिंदगी में हम कई बार असफल भी होते हैं इसका मतलब यह तो नहीं कि हम सब्र को खो बैठे और आत्महत्या कर ले कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा, नवीन जैन ने दी।