ज्ञानी स्वभाव में, जबकि हम भावों में, मोह में रमण करते है- श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा

रतलाम, 21 सितंबर। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय का कहना है कि आत्मा का गुण प्रतिक्रिया करना नहीं है, यह जानने वाला ज्ञानी होता है। ज्ञानी हमेशा स्वभाव में और हम भावों में, मोह में रमण करते है। हमारे सारे जीवन का व्यवहार ही मोह से बंधा है, जबकि ज्ञानी मोह से बहुत दूर रहते है।
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में सोमवार सुबह आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि ज्ञानी और हममे ज्ञान का ही फर्क है। अन्यथा हम भी खाते, वे भी खाते है। हम बोलते है, तो वे भी बोलते है। लेकिन वे सभी क्रियाए विवेक पूर्वक करते है और जितना जरूरी होता है, उतना ही कार्य करते है। यही कारण है कि वे सब कार्य करके भी र्निलिप्त कहलाते है और हम कुछ ना करके भी लिप्त कहला रहे है। उनका जीवन उपयोगमय है और हमारा जीवन उपभोगमय होता है। वे सालों जीते है और आत्मा को पापों से दूर रखते है, जबकि हम ये नहीं कर पाते है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि ज्ञानी क्रोध, लोभ, मान, माया और राग-द्वेष आदि सब छोड चुके होते है, इसलिए उनका कर्मो का बंधन नहीं होता। इसके विपरीत अज्ञानी पर छदमस्त अवस्था में किसी भी कषाय की लहर आती है और वह कर्मों के बंधन में उलझ जाता है। कर्म बंधन तोडने के लिए पुरूषार्थ करना चाहिए। यदि पुरूषार्थ होगा, तो मोक्ष का मार्ग मिल जाएगा।
धर्मसभा को प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र से आए विभिन्न श्री संघ प्रतिनिधियों ने भाव व्यक्त किए। संचालन रखब चत्तर ने किया। धर्मसभा में सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

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