कहानी बदलाव की : जैविक खेती से बदली किसान दशरथ पाटीदार की राह

केंचुआ खाद से खेत की सेहत सुधरी, सालाना दो लाख रुपये की अतिरिक्त आय

रतलाम । सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले में किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के लिए विभिन्न विभागों द्वारा निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका लाभ लेकर ग्राम रसूलपुर मुंडली के प्रगतिशील किसान श्री दशरथ पाटीदार ने जैविक खेती को अपनाया और अपनी मेहनत तथा विभागीय मार्गदर्शन से खेती में नई राह बनाई।
परिवार के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित श्री दशरथ पाटीदार ने परिवार के साथ विचार-विमर्श कर जैविक खेती की ओर बढ़ने का निर्णय लिया। वर्ष 2021 में उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा में अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाई। जांच में खेत की उपजाऊ क्षमता कमजोर होने के साथ ही जीवांश कार्बनिक पदार्थ एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी सामने आई।
समस्या का समाधान तलाशते हुए श्री पाटीदार ने कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं एवं मार्गदर्शन का लाभ लिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से जैविक खेती का 25 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया और अधिकारियों के मार्गदर्शन में केंचुआ खाद का उत्पादन शुरू किया।

एक बेड से शुरू हुआ सफर, अब सालाना दो लाख रुपये की आय
श्री दशरथ पाटीदार ने शुरुआत में केवल एक बेड से केंचुआ खाद तैयार की और इसका उपयोग अपने खेत में किया। केंचुआ खाद के उपयोग से उन्हें खेत की मिट्टी और फसल में सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए। इसके बाद आसपास के किसानों में भी केंचुआ खाद की मांग बढ़ने लगी।
आज श्री पाटीदार अपनी आवश्यकता की केंचुआ खाद खेत में उपयोग करने के साथ ही आसपास के किसानों को भी इसका विक्रय करते हैं। इससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग दो लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

विभागीय मार्गदर्शन से फसल विविधीकरण की ओर बढ़े
श्री पाटीदार बताते हैं कि कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर खेती की समस्याओं के समाधान के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है। अधिकारियों की सलाह के अनुसार उन्होंने फसल चयन में भी बदलाव किया।

अन्य किसानों को भी जैविक खेती के लिए कर रहे प्रेरित
श्री दशरथ पाटीदार अब केंचुआ खाद का उत्पादन और अधिक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जैविक खेती से खेत की मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाए रखने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल सकता है।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से मिले प्रशिक्षण, योजनाओं और विभागीय मार्गदर्शन ने श्री दशरथ पाटीदार को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जैविक खेती, फसल विविधीकरण और कृषि उत्पाद के प्रसंस्करण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। आज वे स्वयं लाभ अर्जित करने के साथ आसपास के किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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