तीन साल बाद आई मिलावटी घी की रिपोर्ट, तब तक बाजार में बिकता रहा माल

जावरा में 2023 में लिए थे घी के नमूने, 2026 में अमानक निकले; पांच प्रतिवादियों पर ₹5 लाख जुर्माना, सवाल-इतनी धीमी जांच में आमजन की सेहत की जिम्मेदारी किसकी

जावरा (अभय सुराणा) । खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच की रफ्तार पर सवाल खड़े करने वाला मामला रतलाम जिले में सामने आया है। जावरा में अक्टूबर 2023 में लिए गए घी के दो नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट करीब तीन साल बाद सामने आई। रिपोर्ट में दोनों नमूनों को अमानक (Substandard) पाया गया। इस मामले में न्याय निर्णायक अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी रतलाम बृजेन्द्र रावत ने पांच प्रतिवादियों पर कुल 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल जांच की लंबी अवधि को लेकर है। वर्ष 2023 में नमूने लिए गए, लेकिन रिपोर्ट 2026 में आई। इस दौरान संबंधित उत्पाद बाजार में उपलब्ध रहा या उसका कितना हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचा, इसकी स्थिति कार्रवाई के दस्तावेजों से स्पष्ट नहीं होती। ऐसे में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और प्रयोगशाला जांच की समयबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं।

28 अक्टूबर 2023 को लिए गए थे नमूने
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ज्योति बघेल ने 28 अक्टूबर 2023 को जावरा स्थित मनीष सेल्स, 62 कोठी बाजार का निरीक्षण किया था। कार्रवाई के दौरान विक्रेता मनीष, पिता वासुदेव चंचलानी के यहां से ‘शक्ति भोग घी’ और ‘अमृत प्योर घी’ के नमूने लिए गए थे। नमूने जांच के लिए राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भेजे गए। लंबे इंतजार के बाद प्राप्त प्रयोगशाला रिपोर्ट में दोनों नमूने अमानक पाए गए। इसके आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने आगे की कार्रवाई की।

पांच प्रतिवादियों पर एक-एक लाख रुपए जुर्माना
मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर एडीएम एवं न्याय निर्णायक अधिकारी बृजेन्द्र रावत ने पांच प्रतिवादियों पर एक-एक लाख रुपए, यानी कुल 5 लाख रुपए का जुर्माना अधिरोपित किया।

कार्रवाई की जद में आने वाले प्रतिष्ठान हैं—

  • मनीष सेल्स, जावरा, रतलाम — विक्रेता
  • कॉम्फी एग्रो प्रा. लि., पंजाब
  • एंजेल ट्रेडिंग कंपनी, इंदौर
  • बाल गोपाल डेयरी उत्पाद, कोटा, राजस्थान
  • एस.टी. ट्रेडर्स, इंदौर

एक सप्ताह में जुर्माना नहीं भरा तो भू-राजस्व बकाया की तरह होगी वसूली
आदेश में निर्धारित अवधि में जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उसे भू-राजस्व बकाया के रूप में वसूलने का प्रावधान किया गया है। जुर्माना जमा होने तक संबंधित खाद्य प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित रखने तथा जब्त खाद्य सामग्री को नियमानुसार नष्ट करने के आदेश भी दिए गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल—रिपोर्ट आने में तीन साल क्यों लगे?
इस पूरे मामले में कार्रवाई से ज्यादा चर्चा अब उस प्रक्रिया की हो रही है, जिसमें नमूना लेने से लेकर जांच रिपोर्ट आने में करीब तीन साल लग गए। खाद्य सुरक्षा का मूल उद्देश्य ही संदिग्ध खाद्य पदार्थ को समय रहते जांचना और अमानक पाए जाने पर बाजार से हटाना है। ऐसे में यदि रिपोर्ट वर्षों बाद सामने आए तो कार्रवाई का उद्देश्य और उसकी समयबद्धता दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

2023 का सैंपल, 2026 में रिपोर्ट—बीच के समय की निगरानी कौन करेगा?
यदि किसी खाद्य उत्पाद का नमूना जांच के लिए भेजा गया है, तो रिपोर्ट आने तक संबंधित उत्पाद के बाजार में उपलब्ध होने की स्थिति पर निगरानी कितनी प्रभावी रही—यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। उपलब्ध कार्रवाई विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि इस अवधि में संबंधित उत्पाद की बिक्री और उपलब्धता पर क्या निगरानी की गई।

मुद्दे की बात: जुर्माना कार्रवाई है, लेकिन समय पर जांच भी जरूरी
खाद्य सुरक्षा मामलों में जुर्माना लगाया जाना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन उपभोक्ता सुरक्षा के लिए जांच रिपोर्ट का समय पर आना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि नमूना लेने और रिपोर्ट आने के बीच वर्षों का अंतर हो, तो व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना होगा कि संदिग्ध खाद्य पदार्थ की निगरानी और आवश्यक अंतरिम कार्रवाई प्रभावी रहे।

आमजन की सेहत से जुड़ा मामला, जवाबदेही तय करने की जरूरत
इस मामले ने खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की क्षमता, नमूनों की जांच की समयसीमा और रिपोर्ट आने तक निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञ स्तर पर यह भी देखा जाना जरूरी है कि लंबित नमूनों की संख्या कितनी है और रिपोर्ट जारी करने की निर्धारित प्रक्रिया क्या है।
सवाल सिर्फ पांच लाख रुपए के जुर्माने का नहीं है। सवाल यह है कि खाद्य पदार्थ के नमूने की जांच समय पर हो, अमानक उत्पाद की जानकारी तुरंत मिले और उपभोक्ताओं तक संदिग्ध सामग्री पहुंचने से पहले कार्रवाई हो—इसके लिए व्यवस्था कितनी तैयार है?
जब खाद्य सुरक्षा सीधे आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ी हो, तब तेज जांच, समयबद्ध रिपोर्ट और प्रभावी कार्रवाई ही व्यवस्था की वास्तविक कसौटी बनती है।समाचार के साथ प्रमुख गाइडलाइन/फैक्ट बॉक्स

मामला क्या है?
28 अक्टूबर 2023 को जावरा के मनीष सेल्स से दो घी के नमूने लिए गए।

रिपोर्ट में क्या आया?
दोनों नमूने अमानक पाए गए।

कार्रवाई क्या हुई?
पांच प्रतिवादियों पर कुल ₹5 लाख जुर्माना।

आगे क्या आदेश?
जुर्माना नहीं भरने पर भू-राजस्व बकाया के रूप में वसूली और संबंधित लाइसेंस निलंबन का प्रावधान।
सबसे बड़ा सवाल – नमूना लेने के करीब तीन साल बाद रिपोर्ट आने तक संबंधित खाद्य उत्पाद की निगरानी और बाजार में उसकी उपलब्धता को लेकर क्या कार्रवाई हुई?

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