
इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । परम पूज्य मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ने आज दलालबाग स्थित विद्या सुधा देशना मंडप में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु की वाणी सुनना श्रद्धा है, लेकिन उस वाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन में अनेक बातों को सुनता, देखता और परखता है। संसार में कई लोग कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं, इसलिए विवेक आवश्यक है। लेकिन धर्म, गुरु और जीवन के मूल संस्कारों के विषय में केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, उसे अपने आचरण में उतारना ही वास्तविक धर्म है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में व्यक्ति अलग-अलग दृष्टिकोण से धर्म को स्वीकार करता है। कोई सुनकर, कोई अपनी परेशानी दूर करने के लिए, कोई इच्छापूर्ति की आशा से और कोई धर्म के वास्तविक स्वरूप को अपने जीवन का आधार बनाकर धर्म को अपनाता है।
गुरु की वाणी पर अमल करना ही सच्ची परीक्षा है। हम साधु-संतों को सुनते हैं, प्रभावित होते हैं, लेकिन जब उन्हीं बातों को जीवन में उतारने की बारी आती है तो अपनी सुविधा और परिस्थितियों का विचार करने लगते हैं।
परीक्षा का उदाहरण देते हुए मुनिश्री ने कहा कि जैसे परीक्षा में कुछ प्रश्न अनिवार्य होते हैं, उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता, वैसे ही धर्म में भी कुछ बातें अनिवार्य हैं। तप-उपवास अपनी शक्ति अनुसार किए जा सकते हैं, लेकिन गलत आदतों व नशे से दूर रहना, माता-पिता का सम्मान करना, गुरु की आज्ञा का पालन करना – ये जीवन के मूलभूत संस्कार हैं, इनमें शक्ति का बहाना नहीं चलना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जब गुरु उपदेश देते हैं तो उसे विवेक से ग्रहण किया जा सकता है, लेकिन जब गुरु अपनी इच्छा या आदेश के रूप में कोई बात कहें, तब शिष्य को यह विचार नहीं करना चाहिए कि “मैं कर पाऊंगा या नहीं।” सच्ची श्रद्धा में गुरु की बात को जीवन में उतारने का भाव होना चाहिए
“धर्म को केवल सुनना धर्म नहीं है, धर्म को समझकर अपने आचरण में उतारना ही वास्तविक साधना है।”
धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और एकाग्रता से प्रवचन सुना। प्रवचन ने सभी को आत्मचिंतन की प्रेरणा दी कि हम प्रतिदिन धर्म सुनते तो हैं, लेकिन उसे जीवन में कितना उतार रहे हैं।
धर्मसभा में प्रमुख रूप से चक्रवर्ती अध्यक्ष सपना मनीष गोधा आनंद नवीन गोधा, अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, आकाश आलोक कोल डॉ जैनेन्द्र जैन प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटोदी, अक्षय कासलीवाल, धर्मेन्द्र जैन, गिरीश जैन ‘गिन्नी’, प्रदीप ,पारस ब्रह्मचारी, विनोद जी भैया, सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।