1 अक्टूबर राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस

रतलाम। वर्षों पहले रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद के लिए जीवन की उम्मीद दुर्घटना में घायल व्यक्ति हो, प्रसव के दौरान महिला, गंभीर बीमारी से जूझ रहा मरीज या नियमित रक्त चढ़ाने वाले थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे सहित कई लोगों का जीवन समय पर उपलब्ध रक्त के लिए भटकते रहते थे। इसी जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने और स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है। इसकी सफलता का असर रतलाम में देखा जा सकता है यहां पर सात ~आठ जिले के मरीज रक्त चढ़ाने के लिए आना पसंद करते हैं क्योंकि इन्हें आसानी से यहां पूर्ण जांच किया हुआ रक्त उपलब्ध हो जाता है| इस सूची में प्रदेश में मानव सेवा समिति का महत्वपूर्ण योगदान हजारों स्वैच्छिक रक्तदाताओं के सहयोग से रहा है|
रक्त मानव शरीर का ऐसा महत्वपूर्ण घटक है, जिसका आज तक कोई पूर्ण कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है। अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेज में रक्त की आवश्यकता लगातार बनी रहती है। ऐसे में स्वस्थ एवं पात्र लोगों द्वारा स्वेच्छा से किया गया रक्तदान रक्त की उपलब्धता बनाए रखने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जरूरत के समय रक्त की उपलब्धता जरूरी
अक्सर दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में परिजन रक्त की व्यवस्था के लिए परेशान होते हैं। यदि समाज में नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या बढ़े तो ऐसी परिस्थितियों में जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है। रक्तदान केवल किसी परिचित या रिश्तेदार के लिए ही नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए भी किया जा सकता है।
थैलेसीमिया मरीजों के लिए रक्तदान बना जीवन का सहारा
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों एवं मरीजों को लंबे समय तक नियमित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसे मरीजों के लिए रक्तदाताओं का सहयोग जीवनरक्षक साबित होता है। इसलिए रक्तदान को केवल एक दिन की गतिविधि न बनाकर नियमित सामाजिक सेवा के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।
भ्रांतियां छोड़ें 105 बार रक्तदान करने का सौभाग्य मिलने पर भी मुझे कोई कमजोरी नहीं आई अतः उन लोगों से निवेदन है जिनके मन में भ्रांति है कि कमजोरी आने या स्वास्थ्य प्रभावित होने की आशंका से रक्तदान नहीं करते हैं। पात्र स्वस्थ व्यक्ति का रक्तदान निर्धारित चिकित्सकीय जांच और स्वास्थ्य मानकों के अनुसार ही कराया जाता है। इसलिए रक्तदान से पहले चिकित्सकीय सलाह एवं पात्रता संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए।युवा स्वैच्छिक रक्तदान के वाहक बने एवम राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर केवल रक्तदान करने नहीं, बल्कि दूसरों को प्रेरित करने के साथ अपने मित्रों, परिवार और समाज में जागरूकता फैलाएं। उन्हें बताएं कि जन्मदिन, वर्षगांठ या किसी विशेष अवसर को रक्तदान से जोड़कर भी इस सेवा को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।रक्तदान किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। स्वस्थ एवं पात्र व्यक्ति जब स्वेच्छा से रक्तदान करता है तो उसकी यह छोटी-सी पहल किसी परिवार की सबसे बड़ी चिंता को दूर कर सकती है। आइए, राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर संकल्प लें—रक्तदान के प्रति भ्रांतियां दूर करेंगे, दूसरों को प्रेरित करेंगे और जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की एक बूंद जरूर पहुंचाएंगे।
“रक्तदान करें—जीवन बचाने की मुहिम से जुड़ें।”