
महासती श्री चंद्रयशाजी मसा की 61 उपवास की दीर्घ तपस्या
रतलाम, 01 अक्टूबर। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय की सदप्रेरणा से तप चक्रेश्वरी वीर वागेश्वरी पूज्या महासती श्री चंद्रयशाजी मसा 61 उपवास की दीर्घ तप आराधना कर रहे है। इसके अनुमोदनार्थ श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति के तत्वावधान में 4 अक्टूबर को तपस्या अनुमोदना महोत्सव का भव्य आयोजन होगा। इसमें मालव केसरीजी की मासिक नवमी के जाप भी होंगे।
मोहन टाकीज स्थित भाग्य से सौभाग्य की ओर चातुर्मास स्थल पर तपस्या अनुमोदना महोत्सव 4 अक्टूबर को सुबह 9 बजे आरंभ होगा। इसमें श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा के साथ मधुर गायिका श्री चंदनबालाजी मसा, उप प्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी मसा एवं वर्धमान आयम्बिल तप आराधिका श्री प्रफुल्लाजी मसा की निश्रा में 8 से 9 बजे तक मालव केसरीजी की मासिक नवमी के जाप होंगे। इसके बाद प्रवचन एवं पद अलंकरण समारोह होगा।
श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पारसमल वोरा, उपाध्यक्ष इंदरमल चैपडा, महामंत्री संदीप चैरडिया, मंत्री रखब चत्तर, कोषाध्यक्ष मुकेश चैरडिया एवं भंवरलाल पुंगलिया सहित श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल ने समाजजनों से उपस्थित रहने का आव्हान किया है।
मन पर नियंत्रण रखे, वही मानव-प्रवर्तकश्री
गुरूवार सुबह श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में आयोजित धर्मसभा में श्रमण संघीय प्रवर्तकश्री प्रकाशमुनिजी मसा ने कहा कि मनुष्य को जिन-जिन से ज्ञान मिलता है, उन सभी को अपना गुरु मानना चाहिए। गुरु के बिना सन्मार्ग नहीं मिलता। गुरु ही भवसागर से पार होने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कोई किसी भी रूप में किसी का सहयोग करता है, तो उसका उपकार मानना चाहिए। गुरु धर्म से जोड़ने के साथ जीवन को धर्ममय और ज्ञान-दर्शन चारित्र तपमय बनाते है, उनका उपकार जीवन का सबसे बडा उपकार होता है। मानव मन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मानव ही मन पर नियंत्रण रख सकता है, क्योंकि वह माँ के गर्भ में 9 माह रहता है। बाकी कोई जीव गर्भ में 9 माह नहीं रहता। मन पर नियंत्रण रखे, वही मानव है। धर्मसभा को आरंभ में प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। इस मौके पर पूना श्री संघ ने प्रवर्तकश्री ने चातुर्मास पश्चात पूना पधारने की विनंती की। धर्मसभा का संचालन आयुष गंग द्वारा किया गया।