‘सुनें सुनाएं’ का पांचवें वर्ष में प्रवेश


रतलाम। किसी शहर की पहचान वहां के रचनात्मकता से होती है। सृजनशीलता से कोई शहर जीवंत लगता है। एक शहर तभी पहचाना जाता है जो वहां के लोग रचनात्मक हों।
उक्त विचार शहर में रचनात्मक वातावरण बनाने और रचनाशीलता से जुड़े लोगों को पठन-पाठन के प्रति आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए आयोजन ‘सुनें सुनाएं’ के पांचवें वर्ष में प्रवेश अवसर पर उपस्थित सुधिजनों ने व्यक्त किए। जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल, रतलाम पर आयोजित 49 वें सोपान में उपस्थितजनों ने ‘ सुनें सुनाएं ‘ की समयबद्धता और स्व अनुशासन की सराहना की। निर्धारित समय पर प्रारंभ होकर निर्धारित समय पर समाप्त होने वाला यह शहर का एकमात्र आयोजन है। बीते अड़तालीस माह के दौरान इस आयोजन का दिन और समय कभी नहीं बदला गया। शहर के रचना प्रेमियों ने स्वप्रेरणा से उपस्थित होकर इस आयोजन को सार्थक बनाया। इन चार वर्षो के सफर में पांच सौ से अधिक रचना प्रेमियों ने अपनी पसंद की रचनाओं का पाठ किया और डेढ़ हजार से अधिक रचना प्रेमी इससे जुड़े।
रचना प्रेमियों ने किया रचना पाठ
इस सोपान में रचना प्रेमियों अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ किया। छत्रपाल सिंह ‘दाताहोकम’ द्वारा पंडित श्याम नारायण पांडे की रचना ‘ थाल सजाकर किसे पूजने चले ‘ का पाठ,कीर्ति शर्मा द्वारा रमेश रंजक की रचना ‘ दमन की चक्की पीस रही इंसान ‘ का पाठ, लाखन सिंह मीणा द्वारा श्री सतीश सृजन की रचना ‘ याज्ञसेनी ‘ का पाठ, ओमप्रकाश मिश्र द्वारा निलेश मिसरा की रचना ‘ हम अपने फ़ोन में ढूंढ क्या रहे हैं ‘ का पाठ, सरिता दशोत्तर द्वारा बच्चालाल उन्मेष की रचना ‘ कौन ज़ात हो भाई?’ का पाठ, विनोद झालानी द्वारा अविनाश जोशी की रचना ‘ आभार में है ताक़त बड़ी ‘ का पाठ, कैलाश व्यास द्वारा डॉ.शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की ‘ कुछ बातें ‘ का पाठ, यूसुफ़ जावेदी द्वारा रतन चौहान की रचना ‘ सरदार ‘ का पाठ, अनीस ख़ान द्वारा उदयप्रताप सिंह की रचना ‘ फूल और कली ‘ का पाठ किया गया।
उल्लेखनीय है कि
इस आयोजन में कोई भी अपनी रचना का पाठ नहीं करता है। यहां अपने प्रिय रचनाकार की एक रचना का पाठ बिना किसी भूमिका के निर्धारित समय में होता है।
इनकी मौजूदगी रही
आयोजन में शहर के सुधिजनों की मौजूदगी रही जिनमें प्रो. रतन चौहान, गुस्ताद अंकलेसरिया,डॉ. प्रदीप सिंह राव, अशोक अग्रवाल, ललित चौरड़िया, श्रीराम दिवे, मुकेश व्यास,ऋषिकेश शर्मा, सुभाष यादव, मांगीलाल नगावत, आई.एल. पुरोहित, मणिलाल पोरवाल , रीता दीक्षित, सांत्वना शुक्ला, गजेंद्र सिंह चाहर , गजेंद्र सिंह चाहर, आशा श्रीवास्तव, डॉ.गोविंद प्रसाद डबकरा, लक्ष्मी कुंवर, ज्योत्स्ना तिवारी, डॉ . गीता दुबे, नरेन्द्र तिवारी, प्रो.दिनेश राजपुरोहित, जितेन्द्र सिंह पथिक, यू.एल.जायसवाल, गजेन्द्र सिंह चौहान, शाश्वत आलोक, पद्माकर पागे, दुष्यंत कुमार व्यास, राजेन्द्र सेन, शैलेन्द्र शितूत, सत्यनारायण सोढ़ा, गफ्फार मंसूरी, हीरालाल खराड़ी, प्रकाश केरवार, ज्योति केरवार, वाजिद हुसैन ख़ान, महावीर वर्मा , आशीष दशोत्तर सहित सुधिजन मौजूद थे।