


रतलाम । सामाजिक विषमताओं को दूर करने के लिए विशेष कर ऊंच नीच छुआछूत, अमीरी-गरीबी, छोटे-बड़े का भेद मिटाने के लिए हमारे सामाजिक लोक पर्वों की भूमिका अति महत्वपूर्ण है । प्रायः हमारे समाज में आपसी प्रेम और सद्भाव हमारे परिवार से आरंभ होता है जो आगे चलकर समाज को एक सूत्र में बांधने में सफल होता है । यही सामाजिक एकता हमारे देश के भाईचारे और सद्भाव को निर्मित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उपरोक्त विचार शासकीय माध्यमिक विद्यालय खाराखेड़ी में आयोजित पारंपरिक पर्व संजा श्रृंगार उत्सव कार्यक्रम में शिक्षक सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने उपस्थित विद्यार्थियों और ग्रामीण जनों को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। आपने कहा कि हमारे पारंपरिक पर्व चाहे होली दीपावली हो या मकर संक्रांति हो या 15 दिवसीय संजा पर्व की बात हो यह सभी पर्व और त्योहार हमें आपस में जुड़कर हमारी संस्कृति का उत्सव मनाने की प्रेरणा देते हैं । संजा पर्व बालिकाओं की रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण है विशेष कर स्कूली बच्चों में हमारे लोक पर्वों काअर्थ और महत्व दोनों यप्रतिपादित होना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ी इनके संरक्षण और उपयोगिता को जान पाए।
श्री दिलीप वर्मा ने कहा कि संजा पर्व हमारी लोक संस्कृति के महत्व का परिचायक है जो ग्रामीण क्षेत्र की मुख्य पहचान रही है विद्यार्थियों को हमारे पर्वों की जानकारी देना बहुत अच्छी बात है । आरंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कार्यक्रम का शुभारंभ किया । विद्यालय की बालिकाओं कुमारी अक्षरा गरवाल, माही सिंगाड, संध्या खराड़ी, दिव्या गरवाल, सोनाली गरवाल, पायल मईडा, इशिका मईडा ने संजा पर्व के प्रसिद्ध गीतों का वाचन किया । अतिथियों का स्वागत प्रधान अध्यापिका ललिता कुशवाहा ने करते हुए कहां की विद्यार्थियों की रचनात्मकता को जीवित रखते हुए उन्हें भारतीय परंपराओं की जानकारी सरलता से दी जा सकती है। कार्यक्रम का संचालन श्री नरेंद्र सिंह पवार ने किया तथा आभार प्रियंका पटेल ने व्यक्त किया । इस अवसर पर अनेक ग्रामीण जन भी उपस्थित थे।