गोबर से संजा बनाकर बालिकाओं ने जीवंत की मालवा की लोक परंपरा

माधवानन्द एकेडमी में आयोजित हुई संजा बनाओ प्रतियोगिता

जावरा (अभय सुराणा) । संजा हमारी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व है। मालवांचल में बालिकाएं घर-घर संजा बनाकर इस पर्व को उल्लासपूर्वक मनाती हैं और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखती हैं। वर्तमान समय में संजा पर्व के स्वरूप में भी बदलाव आया है। अब बालिकाएं गोबर से बनने वाली पारंपरिक संजा के स्थान पर कागज की संजा बनाकर पर्व मनाने लगी हैं। ऐसे में नई पीढ़ी को लोक संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है।
यह विचार माधवानन्द एकेडमी में आयोजित गोबर से संजा बनाओ प्रतियोगिता के अवसर पर संस्था की प्राचार्य उषा श्रोत्रिय ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लोक पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और संस्कारों के वाहक हैं। इन्हें बच्चों से जोड़कर ही आने वाली पीढ़ी तक सुरक्षित रूप से पहुंचाया जा सकता है।
प्रतियोगिता में विद्यालय की 19 बालिकाओं ने गोबर से पारंपरिक संजा तैयार की। बालिकाओं ने संजा के पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया और पर्व को जीवंत स्वरूप प्रदान किया। इस अवसर पर पालक अतिथि श्रीमती चांदनी कुंवर सोलंकी एवं श्रीमती अंगूरबाला मालवीय ने बालिकाओं के प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें पुरस्कृत किया।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संस्था प्राचार्य मनीष शर्मा के साथ माया धाकड़, रचना कुशवाह, खुशी वर्मा, शिवानी शर्मा एवं भूमि राठौड़ ने किया। कार्यक्रम का संचालन अंकित शर्मा ने किया तथा आभार अंकिता चौहान ने माना।

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