साहित्यकार राजेंद्र श्रोत्रीय ने अभय सुराणा एवं राजकुमार हरण सहित साथियों को भेंट की पुस्तक ‘माँ निरुत्तर है’

साहित्यिक साधना, काव्य-सृजन और सामाजिक सरोकारों के लिए देशभर में पहचान बना चुके हैं राजेंद्र श्रोत्रिय

जावरा। साहित्यकार एवं कवि राजेंद्र श्रोत्रीय ने अपनी पुस्तक ‘माँ निरुत्तर है’ की प्रति अंतरराष्ट्रीय जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिला अध्यक्ष राजकुमार हरण एवं अन्य साथियों को भेंट की। इस अवसर पर साहित्य, काव्य-सृजन, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर अभय सुराणा ने राजेंद्र श्रोत्रिय के साहित्यिक लेखन एवं उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्यकार अपनी कलम के माध्यम से समाज की संवेदनाओं, मानवीय मूल्यों और जीवन के विविध पहलुओं को अभिव्यक्ति देता है। राजेंद्र श्रोत्रीय की साहित्यिक यात्रा उनकी सतत साधना, रचनात्मक दृष्टि और समाज के प्रति संवेदनशीलता का परिचायक है। उनकी रचनाएं पाठकों को चिंतन और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिला अध्यक्ष राजकुमार हरण ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य समाज को सही दिशा देने और मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने का सशक्त माध्यम है। साहित्यकारों की रचनाएं समाज में आपसी सद्भाव, मानवीय गरिमा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती हैं।
उल्लेखनीय है कि राजेंद्र श्रोत्रिय का जन्म 26 जुलाई 1965 को हुआ। उन्होंने इतिहास विषय में एम.ए. की शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की है। वर्ष 1988 से वे देश के विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं, आलेखों एवं पत्रों का प्रकाशन कराते आ रहे हैं। राष्ट्रीय कवि के रूप में उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित कवियों के साथ काव्य-पाठ किया है। आकाशवाणी एवं टेलीविजन चैनलों पर भी उनकी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। नीदरलैंड में भारतीय भाइयों के समक्ष काव्य-पाठ करना भी उनकी साहित्यिक यात्रा की उल्लेखनीय उपलब्धि है।
उनकी प्रमुख कृतियों में ‘मुखौटा क्षणिका संग्रह’, ‘मध्यप्रदेश के गुमनाम क्रांतिकारी’, ‘मेरा लॉकडाउन मेरी कविता’, ‘मालवी कृति—ई के कई न करे कई’, ‘जीवन का नेटवर्क’ तथा ‘मेरी उड़ान’ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने अनेक सामाजिक पत्रिकाओं के निर्माण एवं संपादन में भी योगदान दिया है।
साहित्य और काव्य-साधना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इनमें साहित्य रत्न सम्मान, मालवी रत्न सम्मान, हिंदी सागर सम्मान, काव्य गौरव सम्मान, राष्ट्रीय प्रतिष्ठा सम्मान, विशिष्ट हिंदी सम्मान, राइटर गोल्डन अवॉर्ड एवं राष्ट्रीय हिंदी सेवा सम्मान जैसे सम्मान प्रमुख हैं।
राजेंद्र श्रोत्रिय वर्तमान में जावरा के श्री माधवानंद एकेडमी हायर सेकेंडरी स्कूल में डायरेक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वे विनायक शिक्षा शोध जनकल्याण समिति के माध्यम से सामाजिक सेवा परियोजनाओं में सक्रिय हैं तथा विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं से जुड़कर समाज में सकारात्मक चेतना के प्रसार में योगदान दे रहे हैं।
पुस्तक भेंट करने का यह अवसर साहित्य के प्रति सम्मान, रचनात्मक विचारों के आदान-प्रदान और साहित्यकारों के बीच आत्मीय संवाद का प्रेरक प्रसंग बना। इस अवसर पर कनकमल चोरड़िया अनिल श्रीश्रीमाल प्रतीक लोढ़ा आदि सदस्य उपस्थित थे।

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