अध्ययन से लेखन को पूर्णता मिलती है- प्रो. चौहान

‘वेदना के स्वर’ पर समीक्षा गोष्ठी आयोजित

रतलाम । कविता लिखना आसान काम नहीं है । लेखन अध्ययन से पूर्ण होता है । रचनाकार का अध्ययन जितना गहन होगा, लेखन भी उतना ही प्रभावी होगा। कविता केवल विचार नहीं होती, वह हमारे समय की विसंगतियों और रचनात्मक ज़िम्मेदारी की गवाह भी होती है।
उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित समीक्षा गोष्ठी में वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । कवि रणजीत सिंह राठौर के काव्य संग्रह ‘वेदना के स्वर’ की समीक्षा पर केन्द्रित गोष्ठी के अध्यक्षता करते हुए प्रो.चौहान ने कहा कि एक कवि के लिए यह ज़रूरी है कि वह अपने समय और अपने समय के पूर्व के रचनाकारों को ध्यान से पढ़े। इससे लेखन परिपक्व भी होता है और किस तरह लिखा जा रहा है , इसका पता भी चलता है। रणजीत सिंह राठौर की कविता की पहली पुस्तक का आना बहुत सुखद है क्योंकि उनकी कविताएं वैचारिक पृष्ठभूमि को मज़बूत करती है ।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास ने कहा कि कविता का अपना विकास क्रम होता है । हर बड़े रचनाकार ने अपने जीवन में ऐसी श्रेष्ठ रचनाओं का सृजन कर यह संदेश दिया है कि एक रचना को लिखने के पूर्व बहुत गंभीरता बरतनी चाहिए । दुनिया के बड़े रचनाकारों ने महाकवि कालिदास और रविंद्रनाथ टैगोर जैसे रचनाकारों की रचनाओं को इसीलिए सराहा क्योंकि उनकी रचनाएं सघन अभिव्यक्ति का परिचय देता हैं। कवि रणजीत सिंह राठौर ने इस अवसर पर अपनी संग्रह की प्रमुख कविताओं को पाठ करते हुए कहा कि अपने लोगों के बीच अपनी कविता पर खुले मन से सब कुछ सुनना लेखन में बहुत सुधार लाता है। यह मेरा सौभाग्य है कि मेरी कविताओं पर सभी खुले मन से बातचीत कर रहे हैं।
संचालन करते हुए आशीष दशोत्तर ने कहा कि कोई भी विचार कविता नहीं होता और कोई कविता सिर्फ़ विचार तक ही सीमित नहीं रहती । हर कविता के पीछे एक दृश्य मौजूद रहता है जो कवि के मंतव्य को व्यक्त करता है।

इन्होंने की समीक्षा
गोष्ठी में काव्य संग्रह पर मांगीलाल नगावत, विनोद झालानी, सिद्धीक रतलामी ,कला डामोर, कीर्ति शर्मा , जितेंद्र सिंह पथिक, नरेन्द्र सिंह डोडिया,इंदु सिन्हा , पूजा चोपड़ा, पुष्प लता शर्मा , डॉ. गीता दुबे, आशा श्रीवास्तव, रचना चंद्रावत, संजय परसाई ‘सरल’ , जुझार सिंह भाटी, हरिशंकर भटनागर, पद्माकर पागे , ओमप्रकाश मिश्रा , हीरालाल खराड़ी, श्याम सुंदर भाटी, बाबूलाल परमार, निसार पठान ने अपने विचार व्यक्त किए।

इनकी रही मौजूदगी
आयोजन में ललित चौरडिया, दिनेश शर्मा, गीता राठौर, सर्वेश माथुर, सुधांशु मिश्रा, मुकेश सोनी, चरण सिंह यादव, गजेंद्र सिंह चाहर, मीनाक्षी राठौर, रामचंद्र फुहार, विजय सिंह हरोड़, जगदीश चुंडावत , मुकेश सोनी, सत्यनारायण सोढ़ा, गौरीशंकर खींची सहित सुधिजन मौजूद थे। अंत में श्री राठौर का विभिन्न संस्थाओं द्वारा अभिनंदन किया गया।

तरही नाशिस्त 18 अक्टूबर को
जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग द्वारा तरही नाशिस्त के चौथे सोपान का आयोजन 18 अक्टूबर रविवार को प्रातः 11 बजे शहीद भगत सिंह पुस्तकालय , शहर सराय, रतलाम पर किया जाएगा । उर्दू विंग के संयोजक सिद्दीक रतलामी ने बताया कि नाशिस्त में तरही मिसरे ‘आंसू भी उनकी आंख का गौहरनुमा लगे ‘ पर शायर अपनी ग़ज़लें प्रस्तुत करेंगे । उन्होंने सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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