नंदकिशोर श्रोत्रिय के नेत्रदान से दो जिंदगियों में रोशनी की उम्मीद

पुत्र राजेश श्रोत्रिय ने पिता के निधन के बाद नेत्रदान की सहमति दी, मातृशक्ति की उपस्थिति ने पहल को बनाया प्रेरणादायी

रतलाम। अपनों के बिछड़ने का दुःख असहनीय होता है, लेकिन दुःख की इस घड़ी में लिया गया एक नेक निर्णय किसी दूसरे परिवार के जीवन में खुशियों की नई सुबह ला सकता है। राजीव नगर, कस्तूरबा नगर निवासी स्व. नंदकिशोर श्रोत्रिय के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिजनों ने नेत्रदान की सहमति देकर मानवता की प्रेरणादायी मिसाल पेश की।
नेत्रम संस्था के गिरधारीलाल वर्धानी एवं कपिल व्यास की प्रेरणा से स्व. नंदकिशोर श्रोत्रिय के पुत्र राजेश श्रोत्रिय ने पिता के नेत्रदान की सहमति प्रदान की। परिवार के इस निर्णय से दिवंगत की स्मृति को मानव सेवा के पुनीत कार्य से जोड़ दिया गया। नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत ने बताया कि परिजनों की सहमति मिलते ही गीता भवन न्यास, बड़नगर के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही डॉ. ददरवाल तत्काल बड़नगर से रतलाम पहुंचे और मोहनलाल राठौड़ के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई।

नेत्रदान के समय मातृशक्ति की उपस्थिति रही विशेष प्रेरणादायी
नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान मातृशक्ति की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही। उनकी सहभागिता ने यह संदेश दिया कि नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य में महिलाओं की जागरूकता और प्रेरणा समाज में मानवता की भावना को मजबूत करती है। परिवार के दुःख की घड़ी में नेत्रदान के लिए आगे आना संवेदनशीलता, सेवा और परोपकार का अनुकरणीय उदाहरण है।
इस अवसर पर हेमन्त मूणत, शलभ अग्रवाल, नवनीत मेहता, सुशील मीनू माथुर, कपिल व्यास, संध्या व्यास, ज्योति शर्मा, प्रियंका व्यास, राजेश तिवारी, नरेंद्र पुरोहित, आशीष व्यास, अनिल जोशी, संजय शर्मा, शिवम माथुर सहित परिजन एवं स्नेहीजन उपस्थित रहे।

नेत्रदान से किसी की दुनिया में लौट सकती है रोशनी
नेत्रदान केवल एक दान नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में नई उम्मीद जगाने का माध्यम है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो जरूरतमंद व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना बन सकती है। स्व. नंदकिशोर श्रोत्रिय के परिजनों का यह निर्णय समाज को प्रेरित करता है कि दुःख की घड़ी में भी मानवता की सेवा का संकल्प लिया जा सकता है।
नेत्रम संस्था की अपील: प्रत्येक परिवार नेत्रदान के महत्व को समझे, अपने परिजनों के साथ इस विषय पर चर्चा करे और अपनी नेत्रदान की इच्छा पहले से व्यक्त करे। जागरूकता और समय पर सूचना से जरूरतमंदों तक दृष्टि का उपहार पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

नेत्रदान महादान — आपकी आँखें किसी की नई सुबह बन सकती हैं।
नेत्रम संस्था, रतलाम — नेत्रदान के प्रति जागरूक बनें, मानवता की ज्योति जलाएं।

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