लिमडी मैं 23 साधु साध्वी का मधुर मिलन देखकर भक्तों की आंखें छलक पड़ी

लिंबड़ी जैन उपाश्रय । बाहरी उपासना पद्धति को लेकर परस्पर टकराव नफरत और कट्टरता का निर्माण होता है इससे बड़ा पाप और कोई नहीं हो सकता । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने अजरामर एवं गोपाल गादी जैन उपाश्रय में विशाल सभा को संबोधित करते कहा कि धर्म की जाजम पर भेदभाव अपने आप में पाप है उसका कोई स्थान नहीं है ।
उन्होंने कहा कि संप्रदाय की व्यवस्था है विकास के लिए होती है वार्ड बंदी के लिए नहीं धार्मिक क्रिया अमृत का काम करना चाहिए जहर का नहीं ।
गोपाल लिमड़ी संप्रदाय के गच्छधिपति पूज्य उत्तम मुनि जी ने कहा कि दिलों में विशालता विचारों में उदारता आचरण में शालीनता यही धार्मिकता और संत जीवन की पहचान है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े राष्ट्रसंत का सौराष्ट्र में आना संपूर्ण धरती का सौभाग्य का विषय है लाखों जनता आपके विचारों से लाभान्वित होगी । लिमडी मैं 23 साधु साध्वी का मधुर मिलन देखकर भक्तों की आंखें छलक पड़ी । उत्तम गुरुदेव बड़े होकर भी संग को साथ लेकर मुनि कमलेश को लेने के लिए आधा किलो मीटर सामने गए पत्रकार सम्मेलन का आयोजन हुआ ।