

बल्दाना। बुराई के लिए जितने बुरे लोग दोषी है उस पाप के लिए कई गुना ज्यादा दोषी सज्जन लोग हैं जो बुराई के सामने मौन रहकर उनका त्साह बढ़ाने का पाप कमाते हैं उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने विभिन्न धर्म गुरुओं से विचार विमर्श के दौरान व्यक्त करते कहा कि सभी धर्म बुराइयों का विरोध करते हैं ऐसे लोगों का किसी धर्म में प्रवेश नहीं।
उन्होंने कहा कि मुट्ठी भर बुरे लोग हैं लेकिन वह संगठित सक्रिय और प्रशिक्षित है सज्जन लोग भारी संख्या में होने के बावजूद निष्क्रिय बिखरे हुए और दिशा ही नहीं।
मुनि कमलेश ने बताया कि देश में लाखों संतो होने के बावजूद भ्रष्टाचार हिंसा बलात्कार आतंकवाद मिलावट अराजकता रिश्वतखोरी भ्रूण हत्या व्यसनों की भरमार सबके लिए चुनौती आध्यात्मिकता की दुहाई देने वाले के मुंह पर करारा तमाचा है। राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि यदि धार्मिक लोग आपसी मतभेद भुलाकर संगठित होकर बुराइयों के खिलाफ वैचारिक क्रांति का शंखनाद नहीं करेंगे तो उनका अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।
जैन संत ने कहा कि सभी धर्म गुरुओं को मिलकर धार्मिक व्यक्ति की न्यूनतम आचार संहिता का निर्माण करना चाहिए जिसमें नैतिकता हो राष्ट्रभक्त हो व्यसन मुक्त हो पर्यावरण प्रेमी विश्व शांति में विश्वास हो वही सच्चा हिंदू मुस्लिम जैन बौद्ध सिख ईसाई है।
निंबार्क पीठ आचार्य पूज्य श्री ललित किशोर जी महाराज कबीर मठ के महंत चरण दास जी जगदीश मंदिर के प्रमुख सभी ने मिलकर मुनि कमलेश के नेतृत्व में शिक्षा चिकित्सा पर्यावरण रक्षा नशा मुक्ति के लिए मिलकर काम करने का प्रस्ताव पास किया देश की ज्वलंत समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए संत समाज हर संभव प्रयास करेगा सभी ने मुनि कमलेश का अभिनंदन किया।