राजकोट मनहर प्लॉट स्थानकवासी जैन संघ । धर्म आराधना में लीन आत्मा में जब उन्माद का भूत सवार होता है शैतान का रूप ले लेता है । उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने जैन उपाश्रय में धर्म सभा को संबोधित करते कहा कि उन्माद पागलपन की निशानी है वह नास्तिक से भी ज्यादा खतरनाक है ।
उन्होंने कहा कि उन्माद अंधा होता है मानव को विवेक सुन्य बना देता है धार्मिकता औरउन्माद में 36 का आंकड़ा है
मुनि कमलेश ने स्पष्ट कहा कि उन्माद हिंसा और अशांति की जननी है अधर्म पतन और पाप का कारण है आतंकवाद का मूल कारण भी यही है ।
राष्ट्रसंत ने कहा कि विश्व का कोई भी धर्म अथवा महापुरुष उन्माद की इजाजत नहीं देता है इस ज्वाला में दया करुणा प्रेम वात्सल्य सभी गुण जलकर खाक हो जाते हैं इंसान शैतान का रूप ले लेता है ।
जैन संत ने बताया कि उन्माद आने पर अगले का नुकसान हो जाना हो लेकिन स्वयं अशांति का शिकार हो जाता है जिससे ब्रेन हेमरेज हार्ड अटैक ब्लड प्रेशर जैसी जानलेवा बीमारियों का शिकार होता है घनश्याम मुनि, गौतम मुनि ने विचार व्यक्त किए । अक्षत मुनि, कौशल मुनि ने मंगलाचरण किया ।