सम्मेदशिखर जी । तीर्थराज सम्मेद शिखरजी में परम पूज्य अन्तर्मना साधना महोदधि आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज का चातुर्मास स्थापना श्री दिगंबर जैन बिसपंथी कोठी सम्मेद शिखर में हर्षोल्लास के साथ हुआ। बिसपंथी कोठी के मूलनायक 1008 पारसनाथ भगवान के समक्ष 1008 आदिनाथ भगवान के मंदिर में प्रात: गुरुदेव ससंघ के द्वारा नित्य नियम पूजन सहसनाम का जाप करते हुए दीप समर्पित प्रभु चरणों में किया। इसी के साथ आचार्य श्री का कार्यक्रम स्थल पर मंगल आगमन हुआ गुरुदेब ने अपने मुखारविंद से सम्मेद शिखर पहाड़ की भाव पूर्ण यात्रा कराया इसी क्रम में परम पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज बिसपंथी पहुंचकर अंतर्मना आचार्य जी महाराज की सिंहनिष्क्रिय ब्रत ओर मोन साधना की अनुमोदना की साथ ही आज आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज का 52 वा जन्म जयंती महोत्सव मनाया गया । इस अवसर पर पूज्य अन्तर्मना ने कहाँ की आज गुरु पूर्णिमा है और इंसान जिंदगी भर भटकता है फिर गुरु की शरण में आया है दुनिया के पापो में रचा पचा रहता है जब उसके पाप हद से ज्यादा बढ़ जाते है तब उसके पापो को धोने के लिए गुरु की शरण में आता है मा बाप और गुरु ये दोनो ऐसे है जिनके कर्ज जिंदगी भर नहीं चुका सकते जिस तरह जब लाइट के जाने पर एक छोटा सा दीपक कुछ देर के लिए वापिस उजाला कर देता है अंधेरे को हटा देते है उसी तरह मा बाप और गुरु भी अपने जीवन में उजाला लाते है अपने पापो से किए हुए काम को जब जीवन में अंधेरा छा जाता है तब मा बाप गुरु एक ज्ञान का दीपक जलाकर हमारे जीवन में रोशनी कर देते है और एक गुरु जो हमारे जीने का तरीका बदल देते है हमें सद मार्ग पर चलना सीखते है पापो से बचाते है मा पापा और गुरु ये तुम्हारे जीवन के को अनमोल रत्न है जिसे दुनिया की कोई दौलत तागत उसे खरीद नहीं सकती है मा पापा गुरु बड़े अनमोल है जिसका कोई मोल नहीं और आज गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु जिसके पास हो जो गुरु के पास हो वो बड़ा ही किस्मत वाला है आगे अन्तर्मना गुरुदेव ने कहा की सभी गुरु भक्त इस 19 महीने की अवधि में सुनने की शक्ति,गुस्सा को कंट्रोल करना के साथ संयम, झुकने ओर सहन करने की शक्ति के साथ अपने जीवन को संयम की मार्ग पर लगाना है आगे मुनि 108 पीयूष सागर जी मुनिराज ने कहा कि गुरुदेब की 557 दिनों की मोन साधना तक 23 तारीख को सवालाख मंत्रो का जाप करे एवमं प्रतिदिन गुरुनाम की माला ओर सुमिरन करे इस वर्ष चातुर्मास स्थापना में प्रथम बार कलश की स्थापना ना कर सिंहनिस्क्रीडियात व्रत का पालन किया,इसके पश्चयात गुरुदेव अन्तर्मना का केश लोच अपने हाथों से किया इस अवसर पर स्रह्म् संजय जैन,विवेक जैन कोलकोता,नवीन जैन गोधा धनबाद,सुरेश झांझरी,मनीष जैन सेठी,राज कुमार जैन अजमेरा,कोडरमा,एम.पी.अजमेरा, रांची, के अलावा सेकड़ो गुरुभक्त उपस्थित थे । उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन ने दी ।